नई दिल्ली, जून 3। समुद्र में हजारों-लाखों मछलियां की प्रजातियों हैं। इनमें कुछ बहुत कॉमन होती हैं, जो लगभग हर समुद्र पाई जाती हैं। मगर कुछ मछलियां दुर्लभ होती हैं। जो मछली जितनी दुर्लभ होती है, उसकी कीमत भी उतनी ही अधिक होती है। इसके अलावा वजन के लिहाज से भी मछलियों की कीमत बढ़ जाती है। अगर किसी मछुआरे को ऐसी कोई दुर्लभ मछली मिल जाए तो वो रातोंरात अमीर बन सकता है। एक ऐसी ही घटना सामने आई है पड़ोसी देश पाकिस्तान से, जहां एक मछुआरे को एक ऐसी दुर्लभ मछली हाथ लगी। इस एक मछली से वो रातोंरात अमीर बन गया है।
कौन सी मछली पकड़ी
पिश्कन, ग्वादर के एक मछुआरे ने जेवानी के तट पर 48 किलो वजन की एक दुर्लभ मछली पकड़ी, जो 72 लाख रुपये में बिकी। यह घटना बीते रविवार की है। इस मछुआरे ने 48 किलो की अटलांटिक क्रोकर मछली पकड़ी। अटलांटिक क्रोकर एक बेहद दुर्लभ मछली है। एक रिपोर्ट के अनुसार नाविक साजिद हाजी अबाबकर ने रविवार को बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर तट पर इस मछली को पकड़ा।
86.4 लाख रु लगी थी बोली
ये मछली इतनी दुर्लभ है कि इसे बेचने के लिए एक नीलामी हुई। नीलामी में उच्चतम बोली 86.4 लाख रुपये लगी। मगर अबाबकर के मुताबिक छूट की अपनी परंपरा का पालन करते हुए इस मछली के लिए 72 लाख रुपये में समझौता हो गया। ग्वादर में मत्स्य पालन के उप निदेशक अहमद नदीम ने पुष्टि की कि उन्होंने कभी ऐसी मछली नहीं देखी जिसकी कीमत इतनी अधिक हो।
यूरोप और चीन में है इस मछली की मांग
अटलांटिक क्रोकर यूरोप और चीन में अपने मांस और चिकित्सा विज्ञान में स्किन और हड्डियों के उपयोग के लिए बहुत मांग में है। इसी तरह पिछले हफ्ते ग्वादर के तट पर एक मछुआरे ने एक बड़ी क्रोकर मछली पकड़ी थी। वे मछली 7.8 लाख रुपये में बिकी। अटलांटिक क्रोकर का वजन आमतौर पर लगभग 1.2 किलोग्राम होता है।
दवा और सर्जरी में इस्तेमाल
ग्वादर के एक अधिकारी के मुताबिक कुछ मछलियाँ अपने मांस के कारण महंगी होती हैं। लेकिन इस प्रजाति (बड़ी क्रोकर मछली) की उच्च मांग इसलिए है क्योंकि इसके कुछ हिस्सों का दवा और सर्जरी में उपयोग किया जाता है।
सबसे भारी मछली
स्टर्जन मछली आमतौर पर वो सबसे भारी मछली होती है जिसे व्यावसायिक रूप से पकड़ा जाता है। इसका वजन उम्र पर निर्भर करता है, जो 20 किलोग्राम से लेकर 90 किलोग्राम तक होता है।


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