नई दिल्ली, अगस्त 22। रेलवे में कामचोरी करने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं है। आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के कार्यों के मूल्यांकन के तरह ही अब रेलवे के अधिकारियों का भी मुल्यांकन होगा। रेलवे ने सिवील सरवेंट मुल्यांकन सिस्टम के तर्ज पर अधिकारियों का मुल्यांकन शुरू कर दिया है। इस नई प्रक्रिया के तहत अब रिपोर्टिंग अधिकारियों का मूल्यांकन उनके साथी और जूनियर अधिकारी कर पाएंगे। इस नए नियम के बाद न केवल भारतीय रेलवे के अधिकारियों के कार्य प्रणाली में बदलाव आएगा बल्कि कुछ अधिकारि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए भी सोच सकते हैं। एक रेल अधिकारी ने बताया कि नए प्रणाली के तहत करीब 20,000 अधिकारी जांच के दायरे में होंगे।
आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के मुल्यांकन आधार को अपनाया गया है
आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के कार्य के मुल्यांकन के लिए लागू 360 डिग्री मूल्यांकन प्रणाली से प्रेरणा लेकर भारतीय रेलवे ने अब एक ऐसी प्रक्रिया शुरू की है जिसमें समकक्ष अधिकारियों और उनके अधीनस्थों को भी अपने रिपोर्टिंग अधिकारियों के कार्य का मूल्यांकन करने की छूट मिलेगी। रेलवे बोर्ड ने गत 18 अगस्त को एक आदेश जारी कर यह जानकरी दी। रेलवे ने अपने आदेश में कहा कि वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) तैयार करने के लिए अधिकारियों के विषय में 'मल्टी सोर्स' फीडबैक लेने का फैसला किया गया है। ऑनलाइन माध्यम से ही मुल्यांकन किया जाएगा। रेलवे इस प्रणाली को 2022-2023 से प्रभावी करेगी। केन्द्र सरकरा वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के कार्यों के मुल्यांकन के लिए 360 डिग्री मूल्यांकन प्रणाली अपनाती है। मुल्यांकन के आधार पर अधिकारियों का प्रमोशन किया जाता है।
ऑनलाइन माध्यम से लिया जाएगा फिडबैक
रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश में बताया है कि हरेक अधिकारी के लिए हर साल उसके रिपोर्टिंग प्राधिकारी और उसके सभी अधीनस्थ कर्मचारियों को एक लिंक भेजा जाएगा। कर्चारी जो भी फीडबैक देंगे उसे अधिकारी के डेटा बेस में गुमनाम फिडबैक के रूप से दर्ज किया जाएगा। इस प्रणाली में यह उजागर नहीं हो पाएगा कि किस कर्मचारी या अधिकरी ने क्या फिडबैक दिया है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनिय रखा जाएगा।
रेलवे कर्मचारियों की बदलेगी कार्यशैली
नई मूल्यांकन प्रणाली पर अधिकारियों के एक वर्ग का कहना है कि एपीएआर प्रणाली के लागू होने से भारतीय रेलवे में कार्य संस्कृति में बदलाव आएगा। इस नई प्रक्रिया के तहत करीब 20,000 अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं। जानकारों का मानना है कि आगे चलकर फीडबैक लेने का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। आने वाले दिनों में रेल अधिकारियों के साथ ठेकेदारों और विक्रेताओं जैसे गैर-रेलवे लोगों के लिए इस प्रणाली का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
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