नई दिल्ली, अगस्त 31। अपने व्यवसायी फैसलों के लिए मशहूर अजय पीरामल, पीरामल ग्रुप के चेयरमैन है। उन्होंने अपने समूह को पिछले 4 दशकों में एक अलग ऊंचाई में पहुंचाया है। उन्होंने वर्ष 1980 के दशक के अंत तक वे एक कपड़ा और मशीन टूल कंपनी भी चला रहे थे। ये काम विरासत में अजय पीरामल को अपने पिताजी से मिला था। तो चलिए जानते है अजय पीरामल सफलता कि कहानी।
इस कंपनी की जिम्मेदारी पिता ने सौंपी थी
4 बिलियन डॉलर का अजय पीरामल का पीरामल एंटरप्राइजेज रियल एस्टेट, हेल्थ केयर, वित्तीय सेवाओं, फार्मास्युटिकल और ग्लास पैकेजिंग क्षेत्रों में काम करता है। दुनिया के लगभग 30 देशों में पीरामल ग्रुप का कार्यालय है। जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडीज से एमबीए की पढ़ाई करने के बाद अजय पीरामल ने अपने फैमिली बिजनेस को देखना शुरू कर दिया। उसके बाद उनके पिता ने उनको अधिग्रहीत कंपनी मीरांडा टूल्स की सारी जिम्मेदारी अजय पीरामल की सौंप दी थी। फार्मा सेक्टर में आने से पूर्व अजय ने टेक्सटाइल बिजनेस को भी आगे बढ़ाने को कोशिश की थी। मगर निराशा का सामना करना पड़ा उसके बाद उन्होंने फार्मा सेक्टर की तरफ रुख किया।
1.6 अरब डॉलर का इजाफा निजी संपत्ति में करा था
वर्ष 2010 में अपनी दवा कंपनी निकोलस पीरामल को अजय पीरामल ने मशहूर एबोट को बेच दिया था। अजय ने एबोट को निकोलस पीरामल 30 गुना मुनाफे पर बेचा था। इस कंपनी के बेचने के फैसले से बहुत से लोग हैरान रह गए। मगर एबोट को अपनी कंपनी बेचने के निर्णय से पीरामल की निजी संपत्ति में 1.6 अरब डॉलर का बढ़ोतरी कर था।
वोडाफोन से भी पीरामल ने कमाई करी थी
एक समय में वोडाफोन के माध्यम से अजय पीरामल ने एक मोटी रकम की कमाई करा था। आज देश में जो बिजनेस के लिए संघर्ष कर रहे है। उन्होंने वोडाफोन इंडिया लिमिटेड के अपने सारे शेयर वर्ष 2014 में प्राइम मेटल लिमिटेड को 8900 करोड़ रूपये में बेच दिए थे।


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