TCS के 40,000 कर्मचारियों को मिला इनकम टैक्स से नोटिस, आखिर क्या है वजह?

Tcs employee tax notice: टीसीएस (TCS) के कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है. टीसीएस के लगभग 40 हजार कर्मचारियों को इनकम टैक्स से नोटिस भेजा गया है. ऐसा कहा जा रहा है कि ये नोटिस टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त गलतियों होने की वजह से भेजा है.

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टीसीएस जिसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज भी कहा जाता है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टीसीएस के कई कर्मचारियोंं को बड़ा झटका दिया है. इनकम टैक्स ने टीसीएस के 40,000 कर्मचारियों को डिमांड नोटिस भेजा है. यह बताया जा रहा है कि कर्मचारियों ने इनकम टैक्स फाइल करते वक्त गलतियां की है. वहीं ऐसा भी कहा जा रहा है कि कर्मचारियों ने टीडीएस (TDS) क्लेम करते वक्त गलतियां की है.

इनकम टैक्स ने अपने नोटिस में कहा है कि उन्हें इस गलती की वजह से 50,000 रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक टैक्स देना पड़ेगा.

कंपनी ने दिया ये सुझाव

कंपनी ने अपने सभी कर्मचारियों को ईमेल भेजा है. कंपनी ने अपने ईमेल में कहा है कि जिन भी कर्मचारियों को ये नोटिस मिला है. उन्हें अभी टैक्स पेय करने की कोई जरूरत नहीं है. इसके अलावा उन्होंने ईमेल में आगे लिखा है कि इनकम टैक्स उन्हें गलती सुधारने का आगे एक इंटिमेशन देगी. इसलिए उन्हें अभी टैक्स देने की कोई जरूरत नहीं है.

इसके साथ ही कंपनी ने अपने कर्मचारियों को सूचित किया की कर्मचारियों ने जो भी गलती की है. वे टैक्स अथारिटीज के रिक्टफिकेशन इंटिमेंशन (Rectification Intimation) से ठीक हो सकता है.

क्या रिक्टफिकेशन से गलती ठीक हो सकती है ?

कंपनी ने ईमेल में बताया कि इनकम टैक्स डिर्पाटमेंट की तरफ से फिर से टैक्स रिटर्न प्रोसेस किया जाएगा. इसके लिए आयकर विभाग फॉर्म नंबर 26 एएस देगा. जिसके बाद फॉर्म नंबर 26एएस और फॉर्म नंबर 16ए के बीच डेटा फर्क खत्म हो जाएगा.

इसके अलावा कंपनी ने अपने कर्मचारियों को ये सलाह दी है कि वे चाहे तो टैक्स एडवाइजर्स से भी इसके बारे में सलाह ले सकते हैं या फिर कंपनी के फाइनेशल एक्सपर्ट से बातचीत कर सकते हैं.

इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक इनकम टैक्स डिर्पाटमेंट की तरफ से जारी किए गए फॉर्म नंबर 26एएस में अलग-अलग इनकम स्त्रोत से काटे गए टैक्स की पूरी जानकारी शामिल होती है. वहीं इनकम टैक्स के फॉर्म नंबर 16 ए में इनकम से काटी गई टैक्स की जानकारी होती है.

इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक इनकम टैक्स सेक्शन 154(2) के तहत दो तरह के नोटिस भेजता है. पहले नोटिस में वे खुद ही इस बारे में पहल कर सकता है. दूसरे में वे एसेसी या टैक्स डिडिक्टर के अप्लिकेशन पर संशोधन भी कर सकता है.

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