Tax Saving FD: अधिकतर लोग टैक्स सेवर फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए धारणा रखते हैं कि इसमें टैक्स की झंझट नहीं होती है। लेकिन ऐसा होता नहीं है। टैक्स सेविंग एफडी पर भी निवेशक को टैक्स भरना पड़ता है। फिक्स्ड डिपॉजिट के माध्यम से एक फाइनेंशियल इयर में होने वाली आय टैक्स के दायरे में आती है। क्योंकि इसकों आपकी कुल साालना इनकम में जोड़ा जाता है। इसपर टीडीएस भी कटता है। चलिए टैक्स के नियम को विस्तार से समझते हैं ताकि आप भम्र की स्थिति में ना रहें।
टैक्स की गणना
फिक्स्ड डिपॉजिट से निवेशक की सालाना आधार पर जितनी भी कमाई हो रही है, उसे निवेशक की कुल इनकम में जोड़ा जाता है। टैक्स कैलकुलेशन के समय तक अगर आपकों ब्याज नहीं मिला है फिर भी ब्याज दर के हिसाब से रकम आपके साालाना इनकम में जोड़ी जाएगी। आईटीआर में इस आय के स्रोत को हेड में दिखाया जाता है। आपका सालाना आधार जो टीडीएस कटा है उसे भी इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट कुल टैक्स में जोड़ देता है। कुल आय के हिसाब से ही आपकी टैक्स देनदारी तय होती है। अगर आपके पास एक से अधिक एफडी एकाउंट हैं तो उन सभी से होने वाले इनकम को आपके एक वित्त वर्ष के इनकम से जोड़ा जाता है।


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