नई दिल्ली, मार्च 17। वित्त वर्ष 2021-22 खत्म होने वाला है। लोग इस समय आयकर बचाने के लिए कई उपाय करते हैं। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 ईईए के तहत किफायती आवास के लिए उपलब्ध अतिरिक्त टैक्स कटौती का लाभ उठाने के लिए आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप 31 मार्च, 2022 से पहले होम लोन ले लें। ऐसा इसलिए है क्योंकि टैक्स ब्रेक को बजट 2022-23 में विस्तार नहीं दिया गया है और इसलिए यह 1 अप्रैल, 2022 से उपलब्ध नहीं होगा। आगे जानिए पूरी डिटेल।
कितना बेनेफिट मिलता है
धारा 80 ईईए के तहत एक व्यक्ति एक किफायती घर के लिए लिए गए होम लोन पर भुगतान किए गए ब्याज के लिए आईटी अधिनियम की धारा 24 के तहत उपलब्ध 2 लाख रुपये की कटौती के अलावा 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त कटौती के लिए क्लेम कर सकता है।
टोटल 3.5 लाख रु का फायदा
धारा 24 और 80 ईईए का उपयोग करके होम लोन पर भुगतान किए गए ब्याज के लिए एक व्यक्ति द्वारा प्राप्त की जा सकने वाली अधिकतम कटौती 3.5 लाख रुपये है।
3 कंडीशन पूरा करना जरूरी
धारा 80 ईईए के तहत बताई गई कटौती का दावा करने के लिए तीन शर्तों को पूरा करने की आवश्यकता है। पहला ऋण देने वाली वित्तीय संस्था द्वारा 1 अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2022 के बीच की अवधि के दौरान लोन पास किया गया हो। दूसरा रेसिडेंशियल हाउस प्रॉपर्टी का स्टाम्प शुल्क मूल्य 45 लाख रुपये से अधिक नहीं हो और तीसरा ऋण की मंजूरी की तिथि पर किसी व्यक्ति के पास कोई आवासीय संपत्ति नहीं हो।
31 मार्च तक लोन पास होना जरूरी
जानकार कहते हैं कि धारा 80 ईईए के तहत कटौती का दावा करने के लिए, एक व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका होम लोन 31 मार्च, 2022 को या उससे पहले स्वीकृत हो गया है। एक बार लोन मंजूर हो जाने के बाद, व्यक्ति इस कटौती का दावा तब तक कर सकेगा जब तक कि होम लोन भविष्य के वित्तीय वर्षों में पूरी तरह से चुकाया नहीं जाता है।
एचयूएफ को नहीं मिलेगा फायदा
केवल आवासीय घर की संपत्ति खरीदने के लिए धारा 80 ईईए के तहत कटौती का दावा किया जा सकता है। इसके अलावा इस कटौती का दावा केवल व्यक्तिगत खरीदार ही कर सकते हैं। एचयूएफ (हिंदू यूनाइटेड फैमिली) इस कटौती का दावा नहीं कर सकते हैं।
2 टैक्स ब्रेक क्लेम की अनुमति
आयकर कानून किसी व्यक्ति को होम लोन ईएमआई पर 2 टैक्स ब्रेक क्लेम करने की अनुमति देता है। होम लोन की ईएमआई के 2 घटक हैं मूलधन की चुकौती राशि और चुकाया गया ब्याज। एक व्यक्ति प्रिंसिपल राशि पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का लाभ उठा सकता है। वहीं ब्याज के मामले में अधिकतम 2 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं।
3 शर्तों का पूरा होना जरूरी
जानकारों के अनुसार यदि वित्तीय वर्ष के दौरान भुगतान की गई कुल ब्याज राशि 2 लाख रुपये से अधिक है, तो व्यक्ति धारा 80 ईईए के तहत कटौती का दावा कर सकते हैं, बशर्ते उपरोक्त 3 शर्तें पूरी हों।
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