नई दिल्ली। देश का सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी घराना टाटा ग्रुप एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार टाटा ग्रुप की एक कंपनी ने साफ साफ घोषणा कर दी है कि वह न तो अपने कर्मचारियों का वेतन घटाएगी और न ही उनकी छंटनी करेगी। यानी सभी कर्मचारियों की नौकरी कोराना महामारी के दौर में भी सुरक्षित रहेगी। हालांकि कंपनी को अपना उत्पादन घटाकर आधा करना पड़ा है, लेकिन फिर भी ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी, जो कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हो। हालांकि दूसरी तरफ कई कंपनियां कर्मचारियों के वेतन में कटौती या छंटनी जैसे कदम उठा रही हैं। ऐसे में टाटा ग्रुप की इस कंपनी की तरफ से राहत भरी खबर आई है।
पहले से कर रहा है कोरोना से लड़ाई में सरकार की मदद
इससे पहले टाटा ग्रुप कोरोना से लड़ाई में अपना अहम योगदान दे रहा है। टाटा ग्रुप के 5 स्टार ताज होटल कोरोना फाइटर्स यानी डॉक्टरों और मेडिकलकर्मियों को फ्री में खाना सर्व कर रहे हैं। इसके अलावा ताज होटल ने इन डाक्टर्स को फ्री में रुकने का ऑफर भी दिया। इसके बाद जैसे ही पीएम नरेन्द्र मोदी ने पीएम केयर्स फंड की स्थापना की, सबसे पहले जो पहला कार्पोरेट फंड आया वह टाटा संस की तरफ से ही आया। टाटा संस ने सबसे पहले 500 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। इसके अलावा बाद में ग्रुप ने 1000 करोड़ रुपये और देने की घोषणा की।
टाटा स्टील की बड़ी घोषणा
टाटा स्टील के ग्लोबल सीईओ सह प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में कोरोना वायरस को लेकर उत्पादन में की गई कटौती के बाद कर्मचारियों के वेतन में नौकरी और नौकरी से हटाने से साफ मना किया है। टीवी नरेंद्रन के अनुसार अभी कंपनी का पूरा ध्यान वर्तमान में मौजूद कर्मचारी और ऑफिसर की उत्पादकता को बढ़ाने और विकसित करने पर है। हालात ठीक होते ही इस पर दीर्घकालिक योजना तैयार की जाएगी।
लॉकडाउन पूरी तरह से खुलने की अभी उम्मीद कम
टीवी नरेंद्रन ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वर्तमान में जो स्थिति है, भारत में बिना अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाये हुए ही स्वास्थ्य या जीवन से समझौता किये बगैर लॉकडाउन में ढील दी जा सकती है। यह पूछे जाने पर कि लॉकडाउन हटेगा तो क्या हालात होंगे और बाजार की डिमांड कैसी रहेगी, इस पर उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद कम है कि लॉकडाउन को तत्काल पूरी तरह से हटा लिया जाएगा, क्योंकि अभी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। स्थिति सामान्य होने में कम से कम 6 माह से लेकर 1 साल तक का समय जरूर लग सकता है।
स्टील सेक्टर को मिला अनिवार्य सेवा का दर्जा
उन्होंने बताया कि स्टील सेक्टर को अनिवार्य सेवा का दर्जा दिया गया है। ऐसे में उत्पादन में कितनी कटौती की गई है, पूछने पर इस टीवी नरेंद्रन ने कहा कि निश्चित तौर पर लॉकडाउन एक चुनौती का समय है। कलिंगानगर, जमशेदपुर और अंगुल जैसे स्टील उत्पादक प्लांट को संचालित करने की अनुमति मिली हुई थी। लेकिन सिर्फ अकेले स्टील को नहीं बनाया सकता है। इसके सपोर्ट में काफी खनिज और अन्य सामान की जरूरत होती है। इसकी व्यवस्था में दिक्कतें थीं। कार्यस्थल पर ज्यादा कर्माचरियों को काम पर बुलाया जाना भी चुनौतीपूर्ण काम था। परिणामस्वरूप कच्चे माल को खरीदने के बजाए कच्चे माल का बेहतर उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए काम किया गया। अभी उत्पादन को करीब 50 फीसदी कम कर कंपनी का परिचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी कस्टमर, टेक्निशियन सबका अभाव है।
ग्लोबल कारोबार भी प्रभावित
टाटा स्टील के यूरोप प्लांट के कारोबार पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यूरोप में कोई लॉकडाउन नहीं है, लेकिन वहां ऑटो सेक्टर की कंपनियों में मंदी है। वहां भी बिक्री में काफी ज्यादा गिरावट है। लेकिन पैकेजिंग के क्षेत्र में डिमांड बनी हुई है। जहां तक टाटा स्टील के यूरोप प्लांट के कारोबार का सवाल है, तो वहां 70 फीसदी तक की बिक्री हो रही है। हालांकि उन्होंने जल्द ही हालात कुछ सामान्य होने की उम्मीद जताई।
लिक्विडटी को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने कहा कि दो से तीन सप्ताह में कंपनी के रेवेन्यू (राजस्व) में गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन इससे जो लांग टर्म प्लानिंग पर फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि अभी तरलता यानी लिक्विडिटी की काफी कमी होने जा रही है। लघु और मंझोले उद्योगों के अलावा बड़े व्यवसायों के लिए यह कमी होने वाली है। मुश्किल दौर से पहले से ही गुजर रही कंपनियों के समक्ष कोरोना महामारी से लिक्विडिटी की दिक्कतें होंगी। इसके लिए सरकार को बैंकों के साथ मिलकर बाजार में कैसे लिक्विडिटी बनी रहे, यह सुनिश्चित करना चाहिए ताकि इसका लाभ उद्योगों को हो सके।


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