Tata Steel: भारतीय दिग्गज कंपनी टाटा स्टील ने यूनाइटेड किंगडम में पर्यावरण के फ़्रेंडली स्टील प्रोडक्शन की दिशा में अहम फैसला लिया है। कंपनी जुलाई 2025 से पोर्ट टैलबोट में एक नई स्टील यूनिट का कंस्ट्रक्शन शुरू करने जा रही है, जिसमें Electric Arc Furnace (EAF) तकनीक का इस्तेमाल होगा। यह यूनिट पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस की जगह लेगी और इसमें प्रदूषण बेहद कम होगा।

2027 तक प्रोडक्शन की तैयारी
टाटा स्टील की योजना है कि यह यूनिट वित्त वर्ष 2027-28 तक पूरी तरह चालू हो जाए। एक बार यह यूनिट शुरू हो गई तो हर साल करीब 3.2 मिलियन टन कम-कार्बन स्टील का कंस्ट्रक्शन किया जा सकेगा। कंपनी के CEO टीवी नरेंद्रन और CFO कौशिक चटर्जी ने FY2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट में इस योजना की पुष्टि की है।
सरकार दे रही है आर्थिक मदद
इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 1.5 बिलियन डॉलर (लगभग ₹12,500 करोड़) है। अच्छी बात यह है कि ब्रिटेन सरकार इस प्रोजेक्ट में £500 मिलियन (लगभग ₹5,300 करोड़) की मदद कर रही है। इससे यह साफ है कि ब्रिटेन भी इंडस्ट्री को हरित तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
पुराने प्लांट को किया बंद
पोर्ट टैलबोट में मौजूद पुराने और भारी स्टील निर्माण प्लांटों को पहले ही बंद कर दिया गया है। कंपनी अब भारत, नीदरलैंड और अन्य देशों से तैयार मटीरियल लाकर यूके के बाजार की मांग को पूरा कर रही है। इसका मकसद यह भी है कि भारी प्रदूषण फैलाने वाले प्लांट्स की जगह ज्यादा साफ और टिकाऊ तकनीक को अपनाया जाए।
खर्च में कटौती की तैयारी
नई व्यवस्था के तहत टाटा स्टील अपने संचालन खर्च को भी कम करना चाहती है। FY2025 में कंपनी का फिक्स्ड खर्च करीब £762 मिलियन था, जिसे अगले साल £540 मिलियन तक लाने की योजना है। इसके लिए आईटी सिस्टम को अपडेट किया जाएगा, डाउनस्ट्रीम यूनिट्स की संख्या कम की जाएगी और कई प्रशासनिक खर्च घटाए जाएंगे।
प्रदूषण में होगी भारी गिरावट
EAF तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें स्टील निर्माण के लिए स्थानीय स्क्रैप का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की खपत कम होती है और कार्बन उत्सर्जन भी काफी घटता है। कंपनी का अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में यह प्रोजेक्ट 50 मिलियन टन से ज्यादा CO₂ उत्सर्जन को रोक सकेगा।
पर्यावरण के साथ कारोबार भी मजबूत
टाटा स्टील के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कहना है कि यह प्रोजेक्ट न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि कंपनी के वैश्विक बिजनेस को भी मजबूत बनाएगा। इससे टाटा स्टील को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने में मदद मिलेगी।
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