नई दिल्ली। टाटा ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में शापूरजी पालोनजी समूह (एसपी) को टाटा संस में उसकी 18.37 फीसदी शेयर के बदले समूह की किसी अन्य सूचीबद्ध कंपनी के शेयर दिए जाने के प्रस्ताव को निर्थरक बताया है। एसपी समूह ने दावा किया है कि उनकी टाटा संस में हिस्सेदारी का बाजार मूल्य करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये है। मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने टाटा संस से अलग होने के लिए एसपी समूह की तरफ से रखे गए शेयर अदला-बदली के प्रस्ताव को टाटा समूह ने खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबड़े की पीठ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय प्राधिकरण (एनसीएलएटी) के आदेश के खिलाफ दायर टाटा संस और साइरस इंवेस्टमेंट्स की अपीलों पर फाइनल सुनवाई कर रही है। पीठ में न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और वी. रामसुब्रहण्यम भी हैं। एनसीएलएटी ने साइरस मिस्त्री को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर फिर नियुक्त करने का आदेश दिया है। टाटा समूह की टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड (टीएसपीएल) में एसपी समूह की 18.37 हिस्सेदारी है।
ये बताए कारण
एसपी समूह ने अपनी इस हिस्सेदारी के बदले में टाटा समूह की किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में हिस्सेदारी की मांग की है। टाटा समूह के वकील हरीश साल्वे ने कहा है कि यह निर्थरक है। इस तरह की राहत नहीं दी जा सकती है। उन्होंने दलील दी कि इस तरह के प्रस्ताव को स्वीकारने का मतलब है, टाटा समूह की किसी अन्य सूचीबद्ध कंपनी में एसपी समूह फिर से अल्पांश अंशधारक बन जाएगी। इस सुनवाई के तीसरे दिन साइरस इंवेस्टमेंट्स की ओर से पेश हुए वकील सी. ए. सुंदरम ने साल्वे के बाद अपनी दलीलें भी रखीं। सुंदरम ने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि टाटा संस की यह पूरी कार्रवाई, जो उसे एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाती है, अल्पांश हिस्सेदारों (एसपी समूह) को किनारे करने के लिए की गई लगती है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कंपनी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में तब्दील करने की कार्रवाई पूर्वाग्रह पर आधारित है, क्योंकि इससे एसपी समूह उस संरक्षण से वंचित हो गया है, जो उसे इसके एक सार्वजनिक कंपनी होने के चलते मिले थे। हालांकि पीठ ने यह दर्शाने को जानना चाहा कि ठीक-ठीक वह कौन सी कार्रवाई है, जिसे एसपी समूह पूर्वाग्रह और अधिकार का दमन करने वाली मानता है।
ये भी दी दलील
सुंदरम ने कहा कि प्रबंधन में न्यायोचित विश्वास की कमी आना या प्रकारांतर हिस्सेदारी को प्रबंधन से अलग कर देना, किसी कंपनी के परिसमापन का उचित आधार है। उन्होंने टाटा संस के साथ एसपी समूह की पिछली लंबी भागीदारी का उदाहरण दिया और कहा कि टाटा संस मात्र एक निवेश कंपनी है, जो खुद से कोई काम नहीं करती है, लेकिन इसके निदेशक समूह की अन्य कंपनियों के लिए निर्णय लेते हैं।
More From GoodReturns

399 रुपये से कम में बेस्ट OTT प्लान: Jio, Airtel और Vi में से कौन सा है पैसा वसूल?

Vi का 859 रुपये वाला धांसू प्लान: 180 दिनों की वैलिडिटी और अनलिमिटेड डेटा, क्या आपको मिला यह ऑफर?

LIC की नई पॉलिसी लॉन्च: 'बीमा प्लेटिनम' और 'जीवन रक्षा' में से कौन सी है आपके लिए बेस्ट?

पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी: आज आपके शहर में क्या है कीमत? जानें पूरा गणित

IMD अलर्ट: भारी बारिश में गाड़ी-घर का नुकसान? क्लेम पाने का आसान तरीका

9 सितंबर को सोने के दाम: क्या आज खरीदारी का सही मौका है? जानें ताजा भाव

Gold and Silver Price Today: 7 सितंबर को सोने-चांदी के भाव क्या आज खरीदारी का सही मौका है? जानें ताजा रेट

आज 8 सितंबर को सोने के भाव में आई नरमी, क्या खरीदारी का है सही मौका? जानें 22 और 24 कैरेट के ताजा रेट

NSE प्री-ओपन ऑक्शन में बड़ा बदलाव: 7 सितंबर से बदलेंगे नियम, जानें निवेशकों पर क्या होगा असर?

रविवार को सोने-चांदी के भाव स्थिर: क्या आज खरीदारी करना है सही फैसला? जानें 22K-24K के ताजा रेट्स

मुंबई लोकल मेगाब्लॉक: आज वेस्टर्न और सेंट्रल लाइन पर बड़ा असर, घर से निकलने से पहले देखें टाइमिंग



Click it and Unblock the Notifications
