Tata Investment Share Price: भारतीय शेयर बाजार बुधवार को बिकवाली के साथ कारोबार शुरू हुआ। बाजार के दोनों बेंचमार्क लाल निशान पर ट्रेड करते नजर आ रहे हैं।
आज गिरते हुए बाजार में लगातार दूसरे दिन टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (TICL) के स्टॉक्स फोकस में बने हुए हैं, इसके पीछे की वजह है, टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने अपने इतिहास में पहली बार स्टॉक स्प्लिट करने का बड़ा फैसला लिया है। कंपनी को यह मंजूरी अपने शेयरधारकों से मिल चुकी है।

शेयरों का हाल
सुबह 9:39 बजे के करीब, टाटा इनवेस्टमेंट के शेयर बीएसई पर 2.65 फीसदी की तेजी के साथ 8360 रुपए के भाव पर कारोबार कर रहे थे। पिछले एक साल में इस शेयर में महज 19.64% का रिटर्न दिया है। हालांकि पिछले 5 साल में यह अपने निवेशकों को करीब 756 प्रतिशत का मल्टीबैगर रिटर्न दे चुका है। फिलहाल कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 42,298.43 करोड़ रुपए है।
कंपनी के शेयर्स ने 52 वीक हाई अपना 8544 रुपए सितंबर 2025 में टच किया था। वहीं, कंपनी के शेयर्स ने 52 वीक लो 5147 रुपए फरवरी 2025 में टच किया था। कंपनी की मार्केट कैप 14,691.14 करोड़ रुपए है।
1:10 अनुपात में होगा बंटवारा
कंपनी ने बताया कि स्टॉक स्प्लिट 1:10 के अनुपात में होगा। यानी 10 रुपए फेस वैल्यू वाले एक शेयर को तोड़कर 1 रुपए के 10 शेयर बना दिए जाएंगे। इससे निवेशकों के पास शेयरों की संख्या बढ़ जाएगी, लेकिन कुल निवेश वैल्यू वही रहेगी।
पोस्टल बैलट से पास हुआ प्रस्ताव
यह प्रस्ताव शेयरधारकों की मंजूरी से पोस्टल बैलट प्रक्रिया के जरिए पास हुआ। 22 सितंबर 2025 को आए नतीजों में निवेशकों ने न केवल शेयर बंटवारे को मंजूरी दी बल्कि कंपनी के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव को भी स्वीकृति दी।
कब होगा असर?
इस स्टॉक स्प्लिट के लिए कंपनी ने 14 अक्टूबर 2025 को रिकॉर्ड डेट तय की है। इस दिन तक जिन शेयरधारकों के पास कंपनी के शेयर होंगे, उन्हें स्प्लिट का फायदा मिलेगा।
कंपनी का प्रदर्शन
जून तिमाही में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 11.6% बढ़कर 146.3 करोड़ रुपए हो गया, जबकि पिछले साल यह 131.07 करोड़ रुपए था। वहीं, रेवेन्यू भी मामूली बढ़कर 145.46 करोड़ रुपए रहा। मुनाफे में बढ़ोतरी की बड़ी वजह डिविडेंड इनकम बढ़ना रहा।
कंपनी का बैकग्राउन्ड
टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन में टाटा संस और टाटा ग्रुप की अन्य कंपनियों की 73.38% हिस्सेदारी है। यह कंपनी एक NBFC के तौर पर रजिस्टर्ड है और मुख्य रूप से लंबे समय के निवेश पर ध्यान देती है। कंपनी 1959 से बीएसई में लिस्टेड है।
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