नई दिल्ली, सितंबर 09। टाटा समूह ताइवान की एक कंपनी के साथ मिलकर भारत में इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों के निर्माण की तैयारी में है। टाटा ताइवान की जिस कंपनी के बातचित कर रही है वह कंपनी एप्पल इंक के लिए उपकरण बनाती है। विस्ट्रॉन कॉर्प नाम की यह कंपनी एप्पल के प्रोडक्ट बनाती है और एप्पल के फोन एसेंबल करने की मांग भी कर रही है।
टेक्नॉलजि में आगे बढ़ने का टाटा का है उद्देश्य
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक टाटा का विस्ट्रॉन कॉर्प के साथ चर्चा करने का उद्देश्य प्रौद्योगिकी निर्माण के क्षेत्र में एक ताकत बनने का है। मामले के जानकारों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है तो टाटा समूह आईफोन बनाने वाली पहली भारतीय कंपनी बन सकती है। वर्तमान में एप्पल के फोन मुख्य रूप से चीन और भारत में विस्ट्रॉन और फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप जैसे ताइवान के निर्माण दिग्गजों द्वारा असेंबल किए जाते है।
चिन को दे सकती है चुनौती
जानकार मान रहे हैं कि यदि आईफ़ोन बनाने वाली एक भारतीय कंपनी हो जाती है तो चीन को चुनौती देने के देश के प्रयास के लिए एक बड़ा फायदा मिलेगा। चिन इलेक्ट्रॉनिक समानों के निर्माण में एक प्रमुख देश है। चिन के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में प्रभुत्व को कोविड लॉकडाउन और अमेरिका के साथ राजनीतिक तनाव ने खतरे में डाल दिया है। अगर विस्ट्रान के साथ टाटा का समझौता फाइनल हो जाता है तो एप्पल वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांडों को बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के समय चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत में फोन के असेंबलींग पर विचार करने के लिए भी राजी हो सकता है।
अंतिम दौर में है बातचित
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक डिल को फाइनल करने के लिए बातचित अंतिम दौर में है। दोनों कंपनिया संरचना और विवरण जैसे कि शेयरहोल्डिंग आदि मसले पर विचार कर रही हैं। अभी दोनों कंपनियों के बिच बातचीत जारी है। दोनों कंपनिया मिल कर एक एक नया एसेंबलिंग प्लांट बना सकती हैं। एप्पल भी चिन से दूर भारत या किसी अन्य एशेआई देश में अपनी एसेंबलींग सुविधा लगाने पर विचार कर रहा है। ऐसे में यह एप्पल के लिए एक रास्ता हो सकता है। हालांकि, किसी भी कंपनी ने अभी तक अधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।


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