नई दिल्ली, अगस्त 9। सोमवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की तरफ से कहा गया है कि टाटा कम्युनिकेशंस ने 2006-7 से 2017-18 वित्त वर्ष के दौरान अपनी कमाई को कम करके दिखाई है। जिस वजह से भारत सरकार को लाइसेंस के शुल्क के रूप में 645 करोड़ रुपए कम मिले है साथ ही टाटा कम्युनिकेशंस लिमिटेड से सीएजी ने यह राशि को वसूले जाने की आवश्यकता बताई है।
13,252.81 करोड़ रु का सकल राजस्व कम दिखाया गया
सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार एनएलडी (नेशनल लांग डिस्टेंस), आईएलडी (इंटरनेशनल लांग डिस्टेंस) और आईएसपी (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर)-आईटी लाइसेंस के संदर्भ में लाभ-हानि विवरण एवं बहीखाते के संबंध में वर्ष 2006-2007 से लेकर 2017-2018 के बीच समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) ब्योरे के ऑडिट से पता चलता है कि 13,252.81 करोड़ रुपये तक का सकल राजस्व कम दिखाया गया। इसकी वजह से लाइसेंस शुल्क के रूप में 950.25 करोड़ रुपए की कमी देखने को मिली है।
शुल्क 645 करोड़ रुपए का बचा रह जाता है
सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार दूरसंचार विभाग की तरफ से इस कंपनी में मात्र 305.25 करोड़ रुपए का ही शुल्क लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दूरसंचार विभाग के 305.25 करोड़ रुपए के लाइसेंस के शुल्क के आकलन को घटाने के बाद भी लाइसेंस शुल्क 645 करोड़ रुपए का बचा रह जाता है। कंपनी से इस राशि को वसूला जाना चाहिए।
टाटा कम्युनिकेशंस
वर्ष 1986 में विदेश संचार निगम लिमिटेड (वीएसएनएल) की स्थापना हुई थी। वीएसएनएल को भारत में इंटरनेट लाने का श्रेय दिया जाता है। सरकार द्वारा भारत में पब्लिक सेक्टर की इकाइयों का विनिवेश शुरू करने के बाद वर्ष 2004 में वीएसएनएल की विदेशी शाखा शुरू की गई थी। वीएसएनएल को पूरी तरह से टाटा समूह द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया था और वर्ष 2008 को इसका नाम बदलकर टाटा कम्युनिकेशंस कर दिया गया।
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