नई दिल्ली, अक्टूबर 1। एअर इंडिया की घर वापसी लगभग पक्की हो गई है। टाटा ग्रुप ने इसके लिए सबसे ज्यादा बोली लगाई है। ध्यान रहे कि यह देश की पहली एयर लाइंस है, जिसे टाटा ग्रुप ने ही स्थापित किया था। हालांकि अभी सरकार की तरफ से इस बारे में घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस टाटा ग्रुप खरीदने जा रहा है। एयर इंडिया को खरीदने के लिए 15 सितंबर 2021 तक अंतिम बोली लगाई जा सकती थी। एक जानकारी के अनुसार एअर इंडिय को खरीदने के लिए स्पाइसजेट के मालिक अजय सिंह ने भी बोली लगाई है। लेकिन सूत्रों के अनुसार टाटा ग्रुप की बोली उनसे ज्यादा है।

टाटा ग्रुप को एअर इंडिया का 23,286.5 करोड़ रुपये का कर्ज भी लेना होगा
2007 में इंडियन एयरलाइंस का एअर इंडिया में विलय के बाद से कंपनी ने कभी भी मुनाफा नहीं कमाया है। एअर इंडिया के ऊपर मार्च 2021 की खत्म तिमाही में 10,000 करोड़ रुपये का घाटा रिर्पोर्ट किया था। वहीं एअर इंडिया पर 31 मार्च 2019 तक कुल 60,074 करोड़ रुपये का कर्ज था। लेकिन टाटा ग्रुप को इसमें से 23,286.5 करोड़ रुपये का कर्ज अपने ऊपर लेना होगा। बाकी का कर्ज सरकार के खाते में जाएगा।
टाटा की बोली सबसे ज्यादा
जानकारी के अनुसार एअर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप की बोली सबसे ज्यादा रही है। बताया जा रहा है कि टाटा ग्रुप ने रिजर्व प्राइस से 3000 करोड़ रुपये ज्यादा की बोली लगाई है। हालांकि टाटा ग्रुप ने बोली के साथ एक क्षतिपूर्ति शर्त जोड़ी है। इसके अनुसार अगर भविष्य में कोई क्लेम नया आता है तो उसको सरकार देखेगी। टाटा ग्रुप के पास पहले से ही विस्तारा, एयर एशिया जैसी दो एयर लाइंस है। माना जा रहा है कि अगर टाटा ग्रुप को एअर इंडिया की कमान मिल जाती है, तो इन सभी विमान कंपनियों को मिलाकर एक बनाया जा सकता है।


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