Airtel Tariff Hike: भारती एयरटेल के ग्राहकों को जल्द ही टैरिफ प्लान महंगा होने से झटका लग सकता है. भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल टैरिफ में बढ़ोतरी को लेकर एक कार्यक्रम में इसका जिक्र किया है. उन्होंने NDTV वर्ल्ड समिट 2024 में बातचीत के दौरान यह बात की. बताते चलें कि मोबाइल ऑपरेटर कंपनियों ने जुलाई में ही रिचार्ज प्लान महंगा करने का ऐलान किया था.
'ARPU अभी काफी कम'
सुनील मित्तल ने बताया कि एवरेज रेवेन्यू पर यूजर्स (ARPU) अभी भी 2016 के मुकाबले में कम है, इस बात पर जोर देते हुए कि स्पेक्ट्रम और डिजिटल बुनियादी ढांचे में आगे के निवेश के लिए टैरिफ को मौजूदा $2.5 से $5 तक बढ़ाना जरूरी है. यह निवेश एक मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) के ग्रोथ के लिए जरूरी है. इसमें UPI, आधार-बेस्ड आइडेंटिटी और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसे इनोवेशन शामिल हैं. यह आगे अफ्रीका और अन्य विकासशील देशों में भी पहुंचेगा.
मित्तल ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर भी फोकस किया. इसमें महंगाई और पावर, फ्यूल और सैलरी की बढ़ती लागत शामिल है. ऑपरेटिंग कॉस्ट में बढ़त को वर्तमान टैरिफ से पर्याप्त रूप से ऑफसेट नहीं किया गया है.
सैटेलाइट कम्युनिकेशन पर काम जारी
डिजिटल कनेक्टिविटी के मुद्दे पर बात करते हुए मित्तल ने बताया कि अमेरिका और भारत समेत दुनिया भर में ऐसे लोगों की संख्या काफी है जो भौगोलिक बाधाओं के कारण इंटरनेट से कटे हुए हैं. उन्होंने बताया कि एयरटेल सैटेलाइट कम्युनिकेश के ज़रिए यह अंतर को पाटने के लिए तैयार है. कंपनी गुजरात और पांडिचेरी में स्थित ग्राउंड स्टेशनों का उपयोग करके सेवाएं शुरू करने के लिए सरकारी मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहा है.

भारत में नेटवर्क सेवाओं की गुणवत्ता के बारे में मित्तल ने माना कि यूरोप, यूके और अफ्रीका सहित कई अन्य क्षेत्रों की तुलना में डेटा मूल्य निर्धारण पर बेहतर मूल्य प्रदान करने के बावजूद, भारत अभी भी नेटवर्क गुणवत्ता के मामले में जापान, सिंगापुर, दुबई और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से पीछे है. उन्होंने इस अंतर को स्पेक्ट्रम उपलब्धता और टावर साइटिंग से जुड़ी कठिनाइयों जैसी चुनौतियों के लिए जिम्मेदार ठहराया, जो दूरसंचार ऑपरेटरों को कनेक्टिविटी बुनियादी ढांचे को बढ़ाने में बाधा डालती हैं.
बुनियादी ढांचे के विकास पर काम
सुनील मित्तल ने भारत में नए दूरसंचार अधिनियम पर भी बात की, जिसे मोबाइल ऑपरेटरों को पहुंच अधिकार प्रदान करके टावरों और फाइबर ऑप्टिक्स की स्थापना को सुविधाजनक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है. उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का कार्यान्वयन अभी भी विभिन्न राज्य सरकारों में असंगत है, जो बुनियादी ढाँचे के विकास में एकरूपता हासिल करने के लिए एक चुनौती है.


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