Gas Cylinder : हादसे से बचने के लिए इस बात का रखें ध्यान, जानिए पूरी बात

नयी दिल्ली। अकसर सिलेंडर से हादसे की खबर आती रहती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। हादसों के पीछे लापरवाही भी हो सकती है। एक कारण ऐसा भी है जिसके बारे में शायद हर कोई न जानता हो और वो है सिलेंडर की एक्सपायरी डेट। जी हां हर सिलेंडर पर एक एक्सपायरी तारीख दी हुई होती है। इस पर आपको ध्यान देना जरूरी है। सिलेंडर लेते समय ही एक्सपायरी डेट पर ध्यान दें। वरना ये दुर्घटना का कारण बन सकता है। एक्सपायरी डेट वाले सिलेंडर खतरनाक होते हैं। उससे दुर्घटना की संभावना काफी बढ़ जाती है। आइये जानते हैं कैसे और कहां चेक कर सिलेंडर पर एक्सपायरी डेट।

कहां होती एक्सपायरी डेट

कहां होती एक्सपायरी डेट

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम इन तीनों कंपनियों के गैस सिलेंडर में ऊपर वाले गोल घेरे के साथ निचले भाग से जुड़ी लोहे की पट्टियां होती हैं। इनमें दो पट्टियों पर सिलेंडर का वजन होता है, मगर तीसरी पट्टी पर जो नंबर लिखे होते हैं वही असल सिलेंडर की एक्सपायरी डेट होती है। हालांकि वो नंबर किसी कोड की तरह होते हैं। आइये हम आपको समझाते हैं उन कोड का अर्थ।

ए, बी, सी या डी के साथ होता है नंबर

ए, बी, सी या डी के साथ होता है नंबर

सिलेंडर की उस पट्टी पर अंग्रेजी के ए, बी, सी या डी के साथ कोई नंबर लिखा होता है। पहले तो समझ लीजिए कि इनमें ए का अर्थ है जनवरी-मार्च, बी का अर्थ अप्रैल-जून, सी का अर्थ जुलाई-सितंबर और डी का अर्थ अक्टूबर-दिसंबर। यानी ये चारों शब्द साल की चारों तिमाहियों को दर्शाते हैं। इनके साथ लिखा हुआ नंबर होता है वर्ष। अब उदाहरण के लिए किसी सिलेंडर पर लिखा है ए-25, तो इसका मतलब है कि ये सिलेंडर मार्च 2025 में एक्सपायर होगा। इसी तरह अगर लिखा है बी-23 तो इसका अर्थ है कि वो सिलेंडर जुलाई 2023 में एक्सपायर होगा।

सिलेंडर की टेस्टिंग जरूरी

सिलेंडर की टेस्टिंग जरूरी

बता दें हर गैस सिलिंडर को इस्तेमाल करने की निश्चित समय सीमा होती है। इस समय सीमा के बाद सिलेंडर की टेस्टिंग करानी जरूरी है। टेस्टिंग में अगर सिलेंडर उपयोग के लायक न निकले तो आगे से उसका इस्तेमाल नहीं किया जाता। हर नये सिलेंडर की टेस्टिंग 10 से 15 साल में करानी जरूरी है। वहीं पुराने सिलेंडरों की टेस्टिंग हर पांच साल में ही होती है। सिलेंडर की ये टेस्टिंग गैस सिलिंडर प्लांट में होती है। अकसर लोग सालों तक सिलेंडर का इस्तेमाल नहीं करते। मगर इस तरह के सिलेंडर की जांच बहुत जरूरी है। वरना बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

दुर्घटना पर मिलता है 6 लाख रु का बीमा

दुर्घटना पर मिलता है 6 लाख रु का बीमा

क्या आप जानते हैं कि गैस सिलेंडर से कोई दुर्घटना होने पर 6 लाख रु मिलते हैं। सिलेंडर पर 6 लाख रु का बीमा कवर मिलता है, जो किसी दुर्घटना की स्थिति में दिया जाता है। ये बीमा कवर आपके घर में गैस कनेक्शन के लगने के पहले दिन से ही शुरू हो जाता है। यदि कोई दुर्घटना हो जाए तो सबसे पहले अपने एलपीजी वितरक को उसके बारे में सूचित करें। वे वितरक तेल कंपनी से जुड़ी बीमा कंपनी को सूचित करेगा। बीमा कंपनी दुर्घटना क्षेत्र का मुआयना करेगी और फिर मुआवजे में मिलने वाली राशि तय करेगी। कुल मुआवजा राशि ऑयल कंपनी द्वारा दी जाएगी। बीमा राशि एलपीजी वितरक को भेजी जाएगी जो इसे ग्राहक या उसके परिवार को सौंप देगा।

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