नई दिल्ली। एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) मामले में देश की सुप्रीम कोर्ट ने टेलिकॉम कंपनियों को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर बकाया चुकाने के लिए अब कंपनियों को 10 साल का समय दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि टेलिकॉम कंपनियों को बकाया राशि का 10 फीसदी एडवांस में चुकाना होगा। इसके बाद हर साल समय पर बकाया किस्तों में चुकाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 7 फरवरी की समय तय की है। टेलीकाम कंपनियों को हर साल इसी तारीख पर बकाया पैसा चुकाना होगा। वहीं अगर यह पैसा टेलीकाम कंपनियां समय पर नहीं चुकाती हैं तो उनकों इस पर ब्याज देना होगा।

टेलीकॉम सेक्टर पर एजीआर का करीब 1.69 लाख करोड़ रुपये बकाया
माना जा रहा है कि टेलीकॉम कंपनियों पर एजीआर का करकीब 1.69 लाख करोड़ रुपये बकाया है। इसमें अभी तक टेलीकॉम कंपनियों ने 30,254 करोड़ रुपये ही दिया है। वहीं टेलिकॉम कंपनियों ने बचे एजीआर को चुकाने के लिए 15 साल का समय मांग रही थीं, लेकिन अब उनको 10 साल का समय दिया गया है।
पेमेंट डिफाल्ट पर क्या कहा कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट ने पेमेंट डिफाल्ट पर कहा है कि अगर कंपनियां 10 साल के दौरान पेमेंट पर डिफॉल्ट करती हैं, तो ब्याज और जुर्माना देना होगा। इसके अलावा टेलिकॉम कंपनियों को एजीआर बकाया रकम चुकाने का हलफनामा भी सुप्रीम कोर्ट में जमा कराना होगा।
कंपनी के हिसाब से एजीआर
एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) दूरसंचार विभाग की तरफ से टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूजेज चार्ज और लाइसेंसिग फीस होता है। एयरटेल पर 35 हजार करोड़ रुपये, वोडाफोन आइडिया पर 53 हजार करोड़ रुपये और टाटा टेलीसर्विसेज पर करीब 14 हजार करोड़ रुपये का बकाया है।
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