नयी दिल्ली। क्या आपने भी अपनी बेटी के लिए सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) खाता खुलवा रखा है? अगर हां तो ये खबर आपके काफी काम की है। दरअसल वित्त वर्ष 2020-21 खत्म होने में सिर्फ 10 दिन बाकी हैं। यदि आपने अभी तक एसएसवाई खाते में न्यूनतम निवेश नहीं किया तो इन 10 दिनों में जरूर ये काम कर लें। आगामी 10 दिनों में एसएसवाई खाते में न्यूनतम योगदान राशि जरूर जमा करा दें। अगर ऐसा न किया गया तो आपको पोस्ट ऑफिस या बैंक चक्कर काटने होंगे।
जानिए एसएसवाई का जरूरी नियम
एसएसवाई खाते में किसी वित्त वर्ष में कम से कम 500 रु जमा कराना जरूरी है। अगर ऐसा न किया जाए तो आपका एसएसवाई खाता इनएक्टिव हो जाएगा। हालांकि एसएसवाई खाता एक्टिव कराना काफी आसान है, मगर आपको बैंक या पोस्ट ऑफिस (जहां भी आपने खाता खुलवा रखा है) के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। दूसरे आपको 31 मार्च के बाद पैसा जमा कराने पर जुर्माना भी देना होगा।
कितना कर सकते हैं अधिकतम निवेश
किसी भी वित्त वर्ष में कम से कम 500 रु एसएसवाई खाते में जमा कराना जरूरी है। अगर आपने भूल या व्यस्त होने के चलते ये काम नहीं किया तो आने वाले दिनों में तुरंत ये काम करें। 500 रु जमा न हों तो खाते को डिफॉल्ट अकाउंट माना जाता है। जहां तक एसएसवाई में अधिकतम निवेश का सवाल है तो इस स्कीम में ज्यादा से ज्यादा एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रु का निवेश किया जा सकता है।
ऐसे होगा फिर से खाता एक्टिव
अगर आपका एसएसवाई खाता इनएक्टिव हो जाए तो सबसे पहले बैंक या पोस्ट ऑफिस की उस ब्रांच में जाएं जहां आपका खाता है। यहां खाता फिर से चालू कराने के लिए आपको एक फॉर्म भरना होगा। इसके अलावा उन सभी सालों का रुका हुआ पैसा जमा कराना होगा, जिनके लिए आपने योगदान जमा नहीं कराया। साथ में आपसे जुर्माना लिया जाएगा। इसके बाद ही आपका खाता फिर से चालू होगा।
कितनी है ब्याज दर
इस समय एसएसवाई पर 7.6 फीसदी की ब्याज दर दी जा रही है। ये ब्याज दर 31 मार्च तक की तिमाही के लिए है। 1 अप्रैल को इन दरों की समीक्षा होगी। समीक्षा के बाकी पोस्ट ऑफिस स्कीमों की तरह इस स्कीम की ब्याज दर भी घट या बढ़ सकती है। वैसे अनुमान है कि आने वाली तिमाही के लिए भी एसएसवाई की ब्याज दर 7.6 फीसदी ही बरकरार रह सकती है।
जान लीजिए ये नियम
यह खाता छोटी अवधि के निवेशकों के लिए सही नहीं है। बेटी के 21 साल का होने के बाद ही आप जमा किया गया पैसा निकाल सकते हैं। म्यूचुअल फंड और एफडी जैसे विकल्पों में ऐसा नहीं होता। एफडी में आप अपनी मर्जी से 7 से 10 साल तक की अवधि चुन सकते हैं। म्यूचुअल फंड में भी कुछ स्कीमों में लॉक-इन पीरियड होता है। मगर ये बहुत लंबा नहीं होता। लॉक-इन अवधि का मतलब है कि आप इस अवधि में निवेश राशि नहीं निकाल सकते। दूसरी बात यदि आप गलती से किसी वित्तीय वर्ष में 1.5 लाख रुपये से अधिक जमा करते हैं तो जमा की गई अतिरिक्त राशि कोई ब्याज नहीं मिलेगा। मगर एफडी, म्यूचुअल फंड आदि में आप जितना चाहे उतना निवेश कर सकते हैं।
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