
Success Story : आज हम आपको जिसकी सफलता की कहानी बताने जा रहे है उनका नाम कल्पना सरोज है। कल्पना आठ कंपनियों की मालकिन हैं। आज वे सफल है। मगर उनको सफलता इतनी आसानी से नहीं मिली उन्होंने इसके लिए काफी मेहनत की है। कल्पना छोटी सी आयु में गोबर के उपले बनाती थी। लेकिन कल्पना की 12 वर्ष की छोटी सी आयु में 10 वर्ष बड़े व्यक्ति से शादी हो गई। फिर उन्होंने अपने पति की यातनाएं झेली, समाज के ताने झेले लेकिन उनके सफल हौसले की वजह से उन्होंने सफलता को हासिल की, तो आइए जानते है इनके बारे में।
काम किया दो रुपये की मजदूरी पर
कल्पना की शादी बहुत कम आयु में हो गई थी। ससुराल में कल्पना ने काफी तफलीफ सही। लेकिन उनके पिता को मासूम बच्ची की दुर्दशा देखी नही गई और उसको वे घर वापस ले आए। कल्पना को ससुराल से लौट आने के जुर्म में उनके समाज ने कल्पना के परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया। इसके बाद परेशान होकर वे मुंबई आ गई। एक गारमेंट कंपनी में महीने के 60 रूपये, अर्थात दिन के दो रुपये मजदूरी में काम शुरू किया। इसके बाद कल्पना खुद सिलाई करने लगी। उस समय कल्पना को एक ब्लाउज सीती थी। जिसके उन्हें 10 रुपये मिलते थे। वहां, दिन के 16 घंटे काम करती थी और दिन के चार ब्लाउज सिलती थी और दिन के 40 रूपये कमाती थी।
शुरू किया काम सरकारी लोन लेकर
कल्पना ने 50 हजार रु का सरकारी लोन लिया और एक सिलाई मशीन खरीदी और कुछ अन्य सामान को खरीदा और एक बुटीक की दुकान खोल ली। कल्पना का यह बिजनेस चलने लगा। 22 वर्ष की आयु में कल्पना ने फर्नीचर का बिजनेस शुरू किया। कल्पना ने इसके बाद स्टील फर्नीचर के एक व्यापारी से विवाह कर लिया, लेकिन कल्पना के पति साल 1989 में गुजर गए।
इस तरह बदली कल्पना की किस्मत
कमानी ट्यूब्स जो 17 वर्षों से बंद पड़ी थी। उसको सुप्रीम कोर्ट ने उसके कामगारों से शुरू करने को कहा था। उसके बाद कम्पनी के जो कामगार थे। कल्पना से मिलकर सहायता मांगी और कल्पना से कम्पनी को फिर से शुरू करने के लिए मदद मांगी। कामगार और कल्पना ने मिलकर 17 वर्षों से बंद पड़ी हुई जो कम्पनी थी। इसको दोबारा शुरू कर दिया। कल्पना की मेहनत कमाल है। आज कमानी ट्यूब्स करोड़ों रूपये के टर्न ओवर वाली कम्पनी है। इन कंपनियों का रोजाना का टर्न ओवर करोड़ों का है। आज कल्पना कई कंपनियों की मालकिन है।


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