Success Story: क्या है शक्ति कुमार ओझा की कामियाबी की कहानी, कोविड-19 के बाद कैसे खड़ा किया इतना बड़ा बिजनेस

Success Story: आज कल हमने कई लोगों की कामियाबी की कहानी के बारे में सुना या पढ़ा होगा। वहीं आज हम आपको ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने एक बिजनेस को खोया लेकिन उसके साथ ही दूसरे बिजनेस को खड़ा भी कर दिया। हम बात कर रहे हैं, बिहार के रोहतास जिले के ईदगाह मोहल्ले के शक्ति कुमार ओझा के बारे में जिन्होंने कामियाबी की सीढ़ियों को छुआ है।

Success Story shakti kumar ojha

कोविड-19 महामारी के वजह से शक्ति कुमार ओझा मोटर पार्ट्स का बिजनेस बिल्कुल ठप पड़ गया था, लेकिन उन्होंने कभी भी हिम्मत नहीं हारी। बल्कि उन्होंने दूसरे कारोबार की तरफ अपना रुख किया, जिसमें उन्होंने कुल्हड़ और मिट्टी के कप बनाना शुरू किया। इस बिजनेस को शुरू करने से उन्होंने अपना ही नहीं ध्यान रखा बल्कि दूसरों को भी रोजगार दिया।

शक्ति ने जब इस बिजनेस को शुरू किया था तब उन्हे कई बार उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ा लेकिन कभी भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। शक्ति को संदेह था कि यह बिजनेस कितना कामियाब होगा या नहीं आखिर कितना लोग इसे अपनाएंगे या नहीं। समय के साथ-साथ उनका ये बिजनेस सक्सेस की सीढ़ियां चढ़ता चला गया और आज वो हर महीने 4-5 लाख रुपए के मिट्टी के बर्तन बेचते हैं, जिसमें 10% से 15% का उन्हे फायदा भी मिलता है।

रोजगार और उत्पादन

शक्ति के इस कारोबार में 8-10 कारीगर काम करते हैं, जिसमें इन कारीगरों के माध्यम से हर रोज 6,000 कुल्हड़ बनते हैं। जो बाजार में बिकने के लिए चले जाते हैं। लेकिन इस समय मशीनों के काम करने की शक्ति ज्यादा बढ़ गई है, वहीं हर तरीके में होसीयारी से काम करना जरूरी है। इस बिजनेस को शुरू करने के लिए सबसे जरूरी चीज मिट्टी और ईंधन की आती है। स्थानीय मिट्टी की उपलब्धता खर्चों को प्रबंधित करने में मदद करती है।

कोविड-19 महामारी के दौरान अधिकतर कारोबार ठप से पड़ गए थे, उसी बीच शक्ति का बिजनेस भी बिल्कुल बंद सा हो गया था और उनके पास कोई भी इनकम का सोर्स नहीं था। एक दिन चाय पीते हुए उन्हें कुल्हड़ के बारे में ख्याल आया क्यों न इसका बिजनेस शुरू किया जाए। लेकिन ये बिजनेस देखने में आसान लग रहा था, जब कुल्हड़ का काम शुरू किया तब उसके बारे में जानकारी प्राप्त हुई। इस समय शक्ति मिट्टी के कुल्हड़ और कटोरे बनाकर अपनी आजीविका को चला रहे हैं।

भविष्य की आकांक्षाएं

शक्ति कुमार का मानना ​​है कि सरकार अगर उनकी सहायता करती है तो उनका बिजनेस और भी आगे बढ़ सकता है। आधुनिक मशीन और अच्छी तकनीक तक पहुंच से उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में पैठ बनाने में मदद मिल सकती है। सही मार्गदर्शन के साथ अच्छी कामियाबी मिलने की उम्मीद है।

कुल्हड़ का कारोबार कितने दिनों तक चलेगा या लोग इसे पसंद करेंगे या नहीं, इस बारे में शुरुआती संदेह के बावजूद शक्ति कुमार ने दृढ़ता से काम किया। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और समय के साथ उनके उद्यम ने गति पकड़ी।

चुनौतीपूर्ण समय में जो लोग दृढ़ निश्चयी होते हैं, वे अपना भाग्य बदल सकते हैं। शक्ति कुमार ओझा की कहानी इस विश्वास का प्रमाण है।

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