Success Story: पिता बेचते थे कपड़े, दादा मंदिर के पुजारी! ये है भारत के सबसे अमीर ज्वैलर, ऐसे खड़ा किया बिजनेस

India Richest Jeweller Kalyanaraman: ऐसे कई लोगों के बारे में आपने सुना या पढ़ा होगा जिन्होंने बिल्कुल निचले स्तर से अपने कारोबार की शुरुआत की और आज उनका बिजनेस शिखर पर पहुंच गया है। ऐसे ही एक ज्वैलर हैं जिसके दादा मंदिर के पुजारी थे और पिता कपड़े बेचते थे, उन्होंने एक ऐसा बिजनेस खड़ा किया जिसकी कीमत आज 75,000 करोड़ रुपये है। मामूली शुरुआत से शुरू हुए इस बिजनेस के अब भारत भर में 250 शोरूम और यूएई, कतर, कुवैत और ओमान में 30 शोरूम हैं। इस बिजनेस के संस्थापक संयुक्त राज्य अमेरिका में विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। उनका नाम टीएस कल्याणरमन है।

Kalyan Jewellers

कल्याण ज्वैलर्स की ऐसे हुई शुरुआत

इंडिया डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, कल्याणरामन का जन्म 23 अप्रैल 1947 को हुआ था। 12 साल की उम्र में उन्होंने सीतारामय्यर के पारिवारिक बिजनेस में मदद करना शुरू कर दिया था। उन्होंने श्री केरल वर्मा कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

साल 1993 में कल्याणरामन ने केरल के त्रिशूर की एक छोटी सी गली में पहला कल्याण ज्वैलर्स शोरूम खोला था और उनके दादा एक पुजारी थे। कल्याणरामन अक्सर अपने पिता टीआर सीतारामय्यर के साथ स्थानीय मंदिर में पूजा करने जाते थे। सीतारामय्यर ने अपने पिता की इच्छा के परे जाकर कपड़े की दुकान खोली। इसके बाद कुछ सालों बाद ही उनका बिजनेस फलने-फूलने लगा और बाद में उन्होंने त्रिशूर में एक कपड़े का बिजनेस शुरू किया। उन्होंने केरल में कई छोटे-छोटे शोरूम खोले। हालांकि, बाद में राज्य सरकार ने उनकी फैक्ट्री का अधिग्रहण कर लिया।

50 लाख का लोन लेकर शुरू किया बिजनेस

कल्याणरामन ने अपनी सारी बचत 25 लाख रुपये एक ज्वैलरी की दुकान खोलने में लगा दी लेकिन यह रकम इस बिजनेस के लिए काफी नहीं थी, इसलिए उन्होंने 50 लाख रुपये का लोन लिया। 75 लाख रुपये हाथ में लेकर उन्होंने त्रिशूर में पहला शोरूम खोला और इसका नाम कल्याण ज्वैलर्स रखा। उनकी दुकान इलाके की दूसरी दुकानों से आकार में बड़ी थी और ग्राहकों के लिए ज्वैलरी के कई ऑप्शन भी थे।

नए शोरूम ने ग्राहकों को एक अनूठा शॉपिंग अनुभव भी दिया और इससे कल्याण ज्वैलर्स की सफलता की शुरुआत हुई। इस दुकान को खोलने के बाद कल्याणरामन ने पलक्कड़ में दूसरा शोरूम खोला। हालांकि, वहां उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा क्योंकि पलक्कड़ के ग्राहकों का खरीदारी का तरीका त्रिशूर से अलग था।

इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने अपने बेटे रमेश कल्याणरामन को मार्केट रिसर्च करने के लिए पलक्कड़ भेजा। कई हफ्ते बिताने के बाद रमेश ने ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से शोरूम की सेवाओं में बदलाव किया। इतना ही नहीं, हाल ही में कल्याण ज्वैलर्स को 'ग्रेट प्लेस टू वर्क' सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया। इस कंपनी का मार्केट कैप अब 75,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

जानें किनती है नेट वर्थ?

फोर्ब्स रियल टाइम अरबपतियों की सूची के अनुसार, कल्याणरमन की ने वर्थ 4,53,97,49,29,020 रुपये है। कल्याणरामन की रणनीति ने कल्याण ज्वैलर्स को भारत में एक फेमस नाम बनने में मदद की है। कल्याण ज्वैलर्स, एक ऐसा ब्रांड है जो अपने भरोसे और ग्राहक के नजरिए को समझने वाला ब्रांड बन गया है।

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