Success Story: सफलता की कहानी तो आपने बहुत लोगों की सुनी होगी लेकिन आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति की कामयाबी की कहानी बताने जा रहे हैं जिसके बारे में आप सुनकर हैरान हो जाएंगे। आज हम बात कर रहे हैं अलख पांडे की जिन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत ज्यादा संघर्ष किया और कामयाबी ने उनके कदम चूमें।
अलख पांडे अपने करियर के शुरुआती समय में कई बार असफल हुए लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी समय के साथ वह एक कामयाब इंसान बन गए।

आपको अलख पांडे के बारे में पता होना चाहिए जिन्होंने आज 9000 हजार करोड़ से ज्यादा की कंपनी खड़ी कर दी है। वह अपनी पढ़ाई के दौरान कक्षा 10वीं, 12वीं की बोर्ड परीक्षा टॉपर रहे है लेकिन आगे की पढ़ाई आईआईटी की परीक्षा को पास नहीं कर पाए हालांकि उन्होंने कभी अपना हौसला नहीं गवाया हमेशा उम्मीद रखी की कामयाब जरूर होना है।
नहीं कर पाएं अपनी पढ़ाई
अलख पांडे का जन्म उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के एक छोटे से गांव में हुआ था। वहीं से उन्होंने अपने सपनों की उड़ान भर ली थी, यहीं रहते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई शुरू की और अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पढ़ाना शुरू कर दिया था जब वह कक्षा 8वीं में थे अपने घर की वित्तीय स्थिति को देखते हुए पढ़ाना शुरू कर दिया था।
पांडे बच्चों को पढ़ाने के साथ ही अपनी आगे की तैयार भी करते रहे वह जेईई के एग्जाम को क्रैक नहीं कर पाए। इसको देखते हुए फिर उन्होंने कानपुर के हरकोर्ट बटलर कॉलेज में बीटेक में एडमिशन लिया लेकिन बीच पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने अपने कॉलेज को छोड़ दिया और न ही अपनी बी.टेक की डिग्री ली और फिर वो टीचिंग प्रोफेशन में उतर गए।
पांडे ने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया
अलख पांडे टीचिंग प्रोफेशन में एक नए अंदाज के साथ उतरे थे उन्होंने कॉलेज में प्रोफेसर बनने के बजाय खुद का एक यूट्यूब चैनल स्टार्ट किया और बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी पहली इंकम 5,000 रुपये कमाई थी, जो उनकी कोचिंग फीस के रूप में मिली थी। इसके बाद ही अलख पांडे के नाम से मशहूर उन्होंने अपनी 9100 करोड़ रुपये की कंपनी बनाई, जिसके बाद उनके कदम कामयाबी की तरफ बढ़ते चले गए।
उत्तर प्रदेश से आने वाले आज के समय में युवा कारोबारियों में से एक हैं। आज उनकी कंपनी फिजिक्स वाला के अब 61 यूट्यूब चैनल हैं और 31 मिलियन से ज्यादा यूजर हैं, जो उनकी कामयाबी की पहचान हैं।
यूट्यूब वीडियो सी बढ़ी पहचान
अलख पांडे ने अपने यूट्यूब चैनल की शुरुआत साल 2016 में की थी उनका उद्देश्य गरीब बच्चों को पढ़ाना था, जोकि उन्होंने ठीक वैसा ही किया कोरोना जैसी महामारी के दौरान जब लोग अपने अपने घरों में कैद हो गए थे, तब बच्चों ने उनकी वीडियो को काफी ज्यादा देखा और उनकी बहुत सराहना भी की, उसके बाद उन्होंने साल 2020 में ऐप लॉन्च किया था, जिसमें एक बड़ी संख्या में टीचर और तकनीकी टीम के लोग जुड़े हुए हैं। इस ऐप के शुरू होने से कई लोगों को रोजगार के अवसर मिले और उनकी भी पहचान हुई।
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