नई दिल्ली, सितंबर 2। इस समय देश में लगभग 50 प्रतिशत लोग इंडिगो के एयरप्लेन में सफर करते है। लेकिन वर्ष 2005 में इस कंपनी को कोई नहीं जानता था। इस कंपनी ने दिग्गज कंपनी जैसे किंगफिशर और एयरइंडिया जैसे बड़ी कंपनी को पीछे कर देश के अंदर विमान उद्योग में अपनी पहचान बनाई है। इसकी सफलता के पीछे बहुत ही दिलचस्प कहानी है तो फिर चलिए जानते है इस कंपनी की सफलता के पीछे की कहानी।
इंडिगो की शुरुवात इस तरह हुई
दिल्ली में रहने वाले राहुल भाटिया ने कनाडा से अपनी पढ़ाई पूरी कर भारत वापस आ गए। राहुल के पिता का ट्रैवल एजेंसी का बिजनेस था। वे अपने पिता के बिजनेस को नही करना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने दूसरे बिजनेस को करने को कशिश की मगर कुछ बात नही बनी। इसी बीच राहुल के पिता की तबियत खराब होने की वजह से उन्हें फैमिली कारोबार को संभालना पड़ा। जिसके बाद राहुल ने अपनी कंपनी का नाम बदलकर 'इंटरग्लोब इंटरप्राइजेज' कर दिया और एयरलाइन टिकटों की फ्रेंचाइजी भी ले ली।
अधिक समय तक लिया राहुल ने इस सेक्टर में काम
इस क्षेत्र में काम राहुल ने अधिक समय तक काम किया। साथ ही उन्हें अमेरिका के एक मित्र राकेश गंगवाल से संपर्क में थे। उन दिनों किंगफिशर, जेट और स्पाइसजेट जैसी प्राइवेट एयरलाइंस बहुत पैसे भारत से कमा रही थीं। इस कारण राकेश के सामने राहुल ने प्राइवेट एयरलाइन की शुरुआत करने का प्रस्ताव रखा। बहुत विचार विमर्श के बाद राकेश पार्टनरशिप के लिए सहमत हुए उसके बाद उन्होंने वर्ष 2004 में 'इंटरग्लोब एविएशन' की शुरुआत हुई।
उधारी के विमान से शुरू हुई थी कंपनी
इस कंपनी की शुरुवात बहुत ही दिलचस्प हुई थी। इसकी शुरुवात उधार के पैसे से हुई थी। इस कंपनी ने विमान उधारी पर खरीदा था। मगर इस कंपनी के शुरू होने के बाद इंडिगो काफी अधिक चर्चा में आ गई। बहुत अधिक लोग इस कंपनी जो जानने लगे थे। शुरू में केवल इंडिगो के पास 100 विमान थे। राकेश के पास जान पहचान होने के कारण एयरबस ने उधारी पर 100 विमान दे दिए। उसके बाद ये कंपनी चल गई। 4 अगस्त 2006 को कंपनी ने अपनी पहली उड़ान भरी थी। वर्ष 2011 में कंपनी ने लोगो को एक बार फिर बहुत हैरान कर दिया क्योंकि इस कंपनी ने एयरबस को 180 विमानों का ऑर्डर दिया। उसके बाद इंडिगो में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू कीं।


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