नई दिल्ली, सितंबर 16। यदि हम घड़ी का नाम ले तो सबसे पहले दिमाग में क्या नाम आता हैं। हां सबसे पहले एचएमटी का ही नाम आता हैं। मगर एचएमटी के बाद दूसरा सबसे बड़ा नाम आता हैं तो वो हैं टाइटन। इस कंपनी की बात करें तो ये कंपनी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की बेहद फेवरेट बनी हुई हैं। आज हम इसकी सफलता की कहानी बताएंगे और बताएंगे कि कैसे ये भारत में सबसे पसंदीदा कैसे बनी और कैसे हुई इसकी शुरुआत।
टाइटन की शुरुआत
देश में वर्ष 1980 के व्यक्त एचएमटी बहुत अधिक प्रसिद्ध थी। ये कंपनी एचएमटी भारत सरकार के अधीन थी। इस कंपनी की शुरूआत वर्ष 1953 में हुई थी यानी देश के आजादी के 5 वर्ष बाद इस कंपनी का पूरा नाम हिंदुस्तान मशीन टूल्स लिमिटेड था।
इतिहास टाइटन कंपनी का
घड़ियों के मामले में एचएमटी बहुत ही लोकप्रिय थी। मगर एचएमटी लंबे व्यक्त से मशीन आधारित एनालॉग घड़ियां बना रही थीं। यह वह दौर था जब भारत में दूसरे देशों से लाई अधिकतर घड़ियों की तस्करी और बिक्री देश में की जाती थी। इसी दौरान टाटा ग्रुप के सेंट्रल मैनेजमेंट कैडर में काम करने वाले जेरेक्स देसाई कंपनी के लिए नए व्यापार को तलाश कर रहें थे। उसी व्यक्त उन्हे एक आइडिया आया वो आइडिया था। देश में घड़ियां बनाने का आइडिया।
कुछ इस तरह हुई टाइटन की शुरुवात
टाटा ग्रुप ने क्वेस्टर इन्वेस्टमेंट नाम से एक छोटी सी कंपनी बनाई थी। ये कंपनी टाइटन को शुरू करने के बनाई गई थी और इस कंपनी को टाटा ग्रुप से अलग रखा गया था। टाइटन कंपनी को शुरुआत क्वेस्टर इन्वेस्टमेंट और तमिलनाडु इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने साथ मिल कर करी थी। फिर वे घड़ियां बनाने लगे। इसके बाद जैसे ही कंपनी बेहतर काम करने लगी। टाटा ग्रुप ने क्वेस्टर इन्वेस्टमेंट को खरीद लिया। इसके बाद टाइटन कंपनी टाटा ग्रुप के पास आ गई।


Click it and Unblock the Notifications