नई दिल्ली, जून 22। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एनएसई को-लोकेशन मामले में ओपीजी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक संजय गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने हाल ही में लगभग 10 अन्य लोगों के जांच के बाद संजय गुप्ता की ब्रोकरेज फर्म ओपीजी सिक्योरिटीज की जांच-पड़ताल शुरू की थी। सीबीआई को संजय गुप्ता और उनके फर्म के खिलाफ पूंजी बाजार नियामक (सेबी) के अधिकारियों के साथ सांठगांठ के सबूत मिले है।
अधिकारियों से थी मिलीभगत
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार प्रारंभिक जांच के अनुसार जब सेबी साल 2015-2018 के बीच एनएसई एलगोरिदम स्कैम की जांच कर रही थी तब मुंबई का एक सिंडिकेट जांच कर रहे अधिकारियों तक पहुंचने में गुप्ता की मदद करता था। सीबीआई ने को-लोकेशन केस के पहले एफआईआर में ओपीजी सिक्योरिटीज, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के कुछ अधिकारियों को नामित किया था।
को- लोकेशन सुविधा क्या थी
को-लोकेशन आमतौर पर एक ऐसी सुविधा से है जहां कोई तीसरा पक्ष अपने कंप्यूटर हार्डवेयर के साथ रैक/सर्वर स्पेस को लीज पर ले सकता है। को-लोकेशन सुविधा सर्वर स्थापित करने और डेटा के भंडारण के लिए बिजली की आपूर्ति, बैंडविड्थ और कूलिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करती है। को-लोकेशन स्पेस में इंटरनेट स्पीड और डाटा एक्सेस और स्टोरेज की क्षमता सामान्य इंटरनेट से कहीं अधिक होती है।
NSE को-लोकेशन मामला क्या है
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने 2009 में को- लोकेशन की सुविधा शुरू की थी ताकि व्यापारियों और दलालों को एनएसई के को-लोकेशन डेटा केंद्रों के परिसर में अपने आईटी सर्वर स्थापित करने की अनुमति मिल सके। मामले में आरोप है कि एनएसई के अधिकारियों के कुछ ब्रोकरेज फर्म को सर्वर में अनधिकृत एक्सेस दे दिया था। ट्रेडिंग स्क्रीन पर स्टॉक की कीमतें हर माइक्रो सेकंड में बदलती रहती हैं। सर्वर में पहुंच के कारण दलालों को शेयर के दामों में उतार-चढ़ाव का जल्दी पता लगता था और वे बड़ा लाभ कमाते थे।


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