नई दिल्ली, अप्रैल 27। किसानों के लिए एक अच्छी खबर आई है। कैबिनेट ने 27 अप्रैल को एनपीके (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम) उर्वरकों के लिए सब्सिडी में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है, ताकि वैश्विक कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से प्रभाव को कम किया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने सब्सिडी को 1,650 रुपये से बढ़ा कर 2,500 रुपये प्रति बैग करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिससे सरकारी खजाने पर लगभग 60,000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। सब्सिडी की नई दरें एक अप्रैल से लागू होंगी।
किसानों पर पड़ रहा था बोझ
सरकार ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है जब उर्वरक कंपनियों ने बढ़ती लागत का एक हिस्सा किसानों पर डालना शुरू कर दिया है। उर्वरक प्रमुख इफको ने डीएपी की कीमत 1,200 रुपये से बढ़ा कर 1,350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम (12.5 प्रतिशत की वृद्धि) की है, जबकि एनपीकेएस रेट को 1,290 रुपये से बढ़ाकर 1,400 रुपये प्रति 50 किलो बैग (8.5 प्रतिशत की वृद्धि) कर दिया गया है। एनपीके उर्वरक के अन्य ग्रेड - एनपीके - 1 और 2 - के लिए कीमत 20 रुपये बढ़ कर 1,470 रुपये प्रति बैग हो गई हैं।
उर्वरक की कोई कमी नहीं होगी
हाल ही में, सरकार ने 19 अप्रैल को कहा कि आगामी खरीफ बुवाई के मौसम में उर्वरक की कोई कमी नहीं होगी और वह जल्द ही चालू वित्त वर्ष के लिए गैर-यूरिया मिट्टी के पोषक तत्वों के लिए सब्सिडी दर की घोषणा करेगी। एनपीके उर्वरक की उपलब्धता 2022 खरीफ सीजन में 63.71 लाख टन की आवश्यकता के मुकाबले 77.87 लाख टन आंकी गई है।
2.30 ट्रिलियन रुपये तक हो सकती सब्सिडी
हाल की रिपोर्टों में सामने आया है कि चालू वित्त वर्ष के लिए उर्वरक सब्सिडी 2.30 ट्रिलियन (लाख करोड़) रुपये तक जा सकती है। ये एक वर्ष में उर्वरक सब्सिडी पर सबसे बड़ा खर्च होगा, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 का बजट अनुमान केवल 1.05 ट्रिलियन रुपये का था। इसके पीछे का बड़ा कारण यूक्रेन में युद्ध के चलते कमोडिटी और तेल की कीमतों में तेजी है।


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