नई दिल्ली, सितंबर 08। बढ़ती महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका के बीच भारत की वित्त मंत्री निर्मला सितारमण का वयान आया है। वित्त मंत्री ने एक बयान में कहा है कि देश की आर्थिक वृद्धि सरकार के लिए प्राथमिकता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक वृद्धी के साथ-साथ रोजगार सृजन और धन के समान वितरण पर भी निरंतर फोकस कर रही है। वित्त मंत्री ने अपने बयान में बताया कि पिछले कुछ महीनों में मुद्रास्फीति "प्रबंधनीय स्तर" पर आ गई है।
यूएस-इंडिया समिट में बोल रही थी वित्त मंत्री
यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल द्वारा आयोजित इंडिया आइडियाज समिट में बोलते हुए, सीतारमण ने कहा कि निश्चित रूप से कुछ समस्याएं हैं जिसपर सरकार फोकस कर रही है। सरकार निश्चित रूप से नौकरी, समान धन वितरण कर रही है, जिससे भारत विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। महंगाई का ज्यादा असर भारत पर नहीं पड़ा है, उन्होंने कहा कि मुझे आशा है कि यह आप में से कई लोग इस बात से सहमत है। हमने पिछले कुछ महीनों में दिखाया है कि हम इसे एक प्रबंधनीय स्तर पर लाने में सक्षम हैं।
खाने पिने के वस्तुओं के घटे हैं दाम
नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खाद्य कीमतों में नरमी के कारण जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति कम होकर 6.71 प्रतिशत पर आ गई थी। वित् मंत्री ने कहा "मुझे विश्वास है कि भारत की प्रमुख ताकतें - भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार और विविधता, कुशल जनशक्ति की उपलब्धता और डिजिटल संक्रमण में हुई प्रगति - देश की अर्थव्यवस्था को अगले 20 वर्षों में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 30 प्रतिशत होने में सक्षम बनाएगी। इस प्रक्रिया में भारत और अमेरिका वैश्विक विकास के इंजन बन जाएंगे। दोनों देशों में बहुत कुछ समान है और इस कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में वैश्विक भलाई के लिए दोनों देश सहयोग कर सकते हैं, "।
आरबीआई ने किया है बेहतर काम
अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा दरों में बढ़ोतरी और बैंकों के आक्रामक रुख पर, उन्होंने कहा कि आरबीआई वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा इन कदमों से उभरने वाली अस्थिरता का प्रबंधन करने में सक्षम होगा। सितारमण ने कहा "हमें विश्वास है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए कदम उठाएंगे, यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनकी अर्थव्यवस्था को पर्याप्त मौद्रिक सहायता दी जाए। उन्होनें आगे कहा हमें विश्वास है कि यूएस फेड जो कदम उठा सकता है या यूरोपीय सेंट्रल बैंक कर सकता है, वो जल्दी ही करेंगे।


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