
Indian Stock Market Report 2022 : 2022 में इक्विटी बाजार की राह मुश्किल रही है और नया साल 2023 भी एक और अस्थिर साल हो सकता है। 2023 में भी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा, लेकिन साथ ही अगले साल पॉजिटिव रिटर्न मिलने की भी उम्मीद है। 2022 में 20 फीसदी के दायरे में उतार-चढ़ाव के बाद, हायर इंफ्लेशन, बढ़ती ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती के बावजूद इक्विटी 2022 को 3-4% लाभ के साथ खत्म कर सकता है। इनमें से कुछ चिंताओं के 2023 में भी बरकरार रहने की संभावना है। लेकिन अब जिन प्रमुख चीजों पर फोकस है उनमें विकसित अर्थव्यवस्थाओं द्वारा दरों में कमी और धीरे-धीरे आर्थिक सुधार शामिल हैं। इस बीच जानकारों का मानना है कि बेंचमार्क निफ्टी 50 2023 में 17,000 और 20,000 के बीच रह सकता है।
2022 में ये रहे बड़े फैक्टर
इस साल जिन बड़े फैक्टरों ने शेयर बाजार को प्रभावित किया, उनमें रूस-यूक्रेन युद्ध, लगातार दरों में वृद्धि, महंगाई और डॉलर का मजबूत होना शामिल है। रूस-यूक्रेन युद्ध, मुद्रास्फीति, और अमेरिका में मंदी की आशंका सहित इन कारणों ने 2022 में शेयर बाजार को अस्थिर रखा, जिसके नए साल में भी रहने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अभी भी मुद्रास्फीति से जूझ रहे हैं और उच्च ब्याज दरें ग्रोथ को प्रभावित करेंगी।
दुनिया भर के बाजार प्रभावित
वर्ष 2022 भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक बाजारों के लिए भी अस्थिर रहा। 2023 भी इसके जैसा हो सकता है, क्योंकि मुद्रास्फीति अभी भी प्रमुख कारकों में से एक है और रूस-युक्रेन युद्ध भी जारी है। बाकी इतना जरूर है कि 2022 में भारतीय बाजारों ने वैश्विक बाजारों को अच्छे मार्जिन से मात दी है। जैसे कि जहां सेंसेक्स 2022 में करीब 3 फीसदी से अधिक मजबूत हुआ है, तो वहीं अमेरिका का डॉव जोंस करीब 8.8 फीसदी गिरा है।
नैस्डैक की हालत खराब
अमेरिका टेक हेवी इंडेक्स नैस्डैक की हालत और भी खराब है। ये इस साल अब तक 32 फीसदी से अधिक नीचे फिसला है। जबकि निफ्टी 2022 में अब तक करीब 3 फीसदी मजबूत हुआ है। अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट निवेशकों को मंदी की आशंका का संकेत दे रही है।
विदेशी निवेशक नाराज
2022 में बाकी विदेशी शेयर बाजारों के बीच सबसे अच्छा रिटर्न देने की क्षमता होने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को इस साल नहीं भाया। वे अब तक की सबसे अधिक निकासी का रिकॉर्ड बनाने के लिए तैयार हैं। अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में भी भारतीय बाजार ने विदेशी निवेशकों के पैसे गंवाने के बावजूद डेवलप्ड मार्केट्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। 2022 में अब तक, निफ्टी 50 पर डॉलर का रिटर्न एस एंड पी 500 के लिए 16 प्रतिशत की गिरावट और शंघाई कंपोजिट के लिए 19 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले 4.3 प्रतिशत कम था।
कितने पैसे निकाले
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने इस साल भारतीय शेयर बाजार से करीब 18.1 अरब डॉलर निकाले हैं, जो कि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान इन्हीं निवेशकों द्वारा निकाले गए 13.3 अरब डॉलर से अधिक है।
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