Stock Market Prediction, 24 February: 4 दिन से बाजार में बिकवाली, अगले हफ्ते कैसा रहेगा मार्केट का मूड?

Stock Market Prediction, 24 February: भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दौर जारी है. कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन (21 फरवरी) प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए. सेंसेक्स और निफ्टी में आधे-आधे फीसदी से ज्यादा की गिरावट रही. इसके चलते सेंसेक्स 75300 और निफ्टी 22800 के स्तर पर आ गए. ऑटो सेक्टर पर ज्यादा दबाव दिखा. निफ्टी ऑटो इंडेक्स 10 महीने के निचले स्तर पर फिसल गया. इसके अलावा फार्मा शेयरों में भी तेज बिकवाली है. घरेलू मार्केट में शुक्रवार को लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज किया गया. यह लगातार दूसरी वीकली गिरावट है. ब्रॉडर मार्केट में भी नरमी दर्ज की गई. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी टूटे.

बाजार पर दबाव बनाने वाले फैक्टर्स

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) के वेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि कमजोर ग्लोबल संकेत और हैवीवेट स्टॉक्स में बिकवाली से बाजार पर दबाव बना. ब्रॉडर मार्केट में भी करेक्शन दिखा, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.3% फिसला. स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.7% तक फिसला.

प्रभुदास लीलाधर कैपिटल के एडवाइजरी हेड विक्रम कसत ने कहा कि बाजार पर ग्लोबल टेंशन का असर दिखा. इसमें अमेरिकी रिटैलिएट टैरिफ और विदेशी निवेशकों की बिकवाली शामिल है. विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने 23000 करोड़ रुपए के शेयरों की बिकवाली की. यही वजह है कि सेंसेक्स इंडेक्स फरवरी में अब तक 2300 अंक टूट चुका है. खासकर स्मॉल और मिडकैप शेयरों में ज्यादा करेक्शन दिखा.

उन्होंने कहा कि अमेरिका में जॉब क्लेम आंकड़ों में इजाफा देखा गया. साथ ही कमजोर कॉरपोरेट आउटलुक से वॉल स्ट्रीट पर दबाव बना, जिसका असर घरेलू बाजार पर दिखा. कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली, क्योंकि रूस से सप्लाई चिंताएं हावी हैं.

क्यों टूटे ऑटो-फार्मा सेक्टर? मेटल चमका

बाजार में 21 फरवरी को हुई बिकवाली के बीच एकमात्र मेटल सेक्टर में हरियाली देखने को मिली. निफ्टी मेटल इंडेक्स 1% से ज्यादा उछला. जबकि फार्मा और ऑटो सेक्टर लाल निशान में बंद हुए. निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2.6% तक फिसला, जोकि 10 महीने का सबसे निचला स्तर है. इंडेक्स 15 में 14 कारोबारी सेशन में लाल निशान में बंद हुआ. फार्मा इंडेक्स में 1.92% की कमजोरी दर्ज की गई. सरकारी बैंकिंग, रियल्टी और मीडिया इंडेक्स भी फिसले.

सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि ऑटो सेक्टर में करेक्शन की वजह टेस्ला को लेकर आ रही खबरें हैं, जिसके मुताबिक अप्रैल 2025 में अमेरिकी ईवी कंपनी भारत में एंट्री कर सकती है. कंपनी भारत में रिटेल ऑपरेशंस शुरू कर सकती है. इससे भारत के प्रीमियम ईवी स्पेस में कंपीटिशन बढ़ने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें हैं कि सरकार नई इलेक्ट्रिक पॉलिसी जारी करने पर भी काम कर रही. इसमें ईवी के लिए इंपोर्ट ड्युटी को घटाया जा सकता है. वहीं, रेसिप्रोकल टैरिफ के चलते फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर पर दबाव दिखा. मेटल सेक्टर में तेजी को लेकर MOFSL एनलिस्ट ने कहा कि बेस मेटल में तेजी का जोश मेटल स्टॉक्स में देखने को मिला.

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टैरिफ बढ़ने से टेंशन बढ़ी

शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा ट्रिगर ग्लोबल ट्रेड टेंशन है, जो निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाल रहे हैं. यही वजह है कि सुरक्षित निवेश के तौर पर इक्विटी के बजाय निवेशक सोने को पसंद कर रहे हैं. दरअसल, टैरिफ को लेकर अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने भी चिंता जाहिर किया है. फेड का मानना है कि इंपोर्ट आइटम पर ड्युटी लगाने से अमेरिका डॉमेस्टिक कॉस्ट को बढ़ाएगा. इससे ग्राहकों को प्रोडक्ट्स के लिए ज्यादा भुगतान करना होगा. यह फेड के महंगाई को 2% के अंदर लाने के टारगेट को भी प्रभावित करेगा.

नए टैरिफ की प्लानिंग!

अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर अपना आक्रामक रुख बरकरार रखा है. मौजूदा हफ्ते के शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगले महीने या उससे पहले नए टैरिफ का ऐलान किया जाएगा. इसके तहत लंबर और फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाया जा सकता है. इससे पहले ट्रंप ने कार, सेमीकंडक्टर्स और फार्मास्युटिकल्स के इंपोर्ट पर टैरिफ का ऐलान किया. पिछले हफ्ते ट्रंप ने सभी देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया.

एनलिस्ट्स ने चेताया है कि इस तरह के कदम का असर भारी पड़ सकते हैं. इसके तहत पेट्रोकेमिकल्स और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट पर असर दिख सकता है. क्योंकि ये आइटम्स अमेरिका को भारतीय एक्सपोर्ट होने वाले कुल आंकड़े में से 20 फीसदी है. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अमेरिका का यह कदम ट्रंप की एक स्ट्रैटेजी है. इसके जरिए डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी सामानों पर अन्य देशों से टैरिफ कम कराना चाहते हैं.

एनलिस्ट्स मान रहे हैं कि FOMC मिनट्स में हॉकिश टोन को लेकर भी इनवेस्टर्स चिंता में रहे, क्योंकि इसमें ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने के संकेत मिल रहे. इससे इमर्जिंग मार्केट में लिक्विडिटी का प्रेशर देखने को मिल सकता है. साथ ही टैरिफ बढ़ने के बीच वैल्युएशन हाई रहना भी बाजार के लिए निगेटिव रहा है. विक्रम कसत ने कहा कि चीन के स्टॉक मार्केट को लेकर विदेशी रुचि फिर से बढ़ी है. इसके लिए भारत का प्रीमियम वैल्युएशन चिंताजनक नहीं रहा.

अगले हफ्ते कहां रहेगी नजर?

सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि अगले हफ्ते निफ्टी के कंसोलिडेशन मोड में ही रहने का अनुमान है. साथ ही मिलेजुले ग्लोबल मार्केट संकेत को भी ट्रैक करेंगे, जिसमें अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी ऐलान और जियो-पॉलिटिकल डेलवपमेंट शामिल हैं. खासकर रूस-यूक्रेन वॉर को लेकर आने वाले अपडेट्स पर नजर होगी.

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