शेयर बाजार : जानिए 2019 की सबसे तगड़ी 11 गिरावटें

नयी दिल्ली। 2019 खत्म होने वाला है। यह साल शेयर बाजार के काफी धमाकेदार रहा। शेयर बाजार ने कई बार नये रिकॉर्ड स्तर छुए। दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने काफी बढ़त हासिल की और नयी ऊँचाइयों तक चढ़े। इस साल कई बड़े मौके भी आये, जिनमें नरेंद्र मोदी का दोबारा पीएम बनना, यूनियन बजट और वित्त मंत्रालय द्वारा कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती किया जाना शामिल है। मगर कुछ ऐसे मौके भी आये जब बाजार में तगड़ी गिरावट देखी गयी। 13 दिसंबर तक 2019 में 11 ऐसे मौके आये जब बाजार औंधे मुंह लुढ़का। अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड वॉर की संभावना के कारण बाजार में भारी गिरावट आयी। इस वजह से 17 जून को सेंसेक्स 491 अंक या 1.25 फीसदी टूटा था। वहीं कच्चे तेल की कीमतों के पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुँचने से कारोबारियों को झटका लगा और 22 अप्रैल को सेंसेक्स 495 अंक या 1.26 फीसदी नीचे गिरा। आइये जानते बाकी 9 ऐसे ही मौके, जब बाजार 2019 में तेजी से गिरा।

अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध

अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव, वैश्विक ग्रोथ को लेकर चिंता और मिले-जुले तिमाही वित्तीय आँकड़ों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया, जिससे 8 मई को बाजार 487.50 अंक या 1.27 फीसदी टूटा था। वहीं 19 सितंबर को सेंसेक्स में 470 अंक या 1.29 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गयी थी, जिसके कारणों में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेड की भविष्य की दरों पर अनिश्चितता और बिगड़ता आर्थिक माहौल शामिल था। इसके अलावा 25 सितंबर को सेंसेक्स 504 अंक या 1.29 फीसदी लुढ़का। अर्थव्यवस्था की हालत पर चिंता, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की खबर, मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिका-चीन व्यापार सौदे पर अनिश्चितता ने बाजार को दबाव में ला दिया था।

आरबीआई का महत्वपूर्ण फैसला

आरबीआई का महत्वपूर्ण फैसला

6 जून को सेंसेक्स 554 अंक या 1.38 फीसदी गिरा। दरअसल आरबीआई ने एनबीएफसी सेक्टर के सामने मौजूद नकदी संकट से निपटने के लिए रेपो दरों में कटौती नहीं की थी। साथ ही बाजार बैंकों के डीएचएफएल में फंसे ऋण को लेकर चिंतित था, जो 4 जून को कर्ज चुकाने में चूक गयी थी। वित्त मंत्री द्वारा सुपर-रिच पर लगाये सरचार्ज को हटाने से मना करने और कमजोर वित्तीय नतीजों से विदेशी निवेशकों के बीच नाखुशी से 19 जुलाई को सेंसेक्स 560 अंक या 1.44 फीसदी लुढ़क गया था। इसके बाद किसी प्रोत्साहन की कमी की वजह से 22 अगस्त को सेंसेक्स 587 अंक या 1.60 फीसदी कमजोर हुआ।

कमजोर विदेशी और घरेलू संकेत

कमजोर विदेशी और घरेलू संकेत

कमजोर विदेशी और घरेलू संकेतों, विदेशी निवेशकों पर सरचार्ज टैक्स पर राहत को लेकर कोई स्पष्टता न होने के चलते 13 अगस्त को सेंसेक्स 624 अंक या 1.66 फीसदी टूटा। 17 सितंबर को रुपये में कमजोरी और सऊदी अरब के ऑयल प्लांट पर हमले के कारण बढ़े भू-राजनीतिक तनाव की वजह से बाजार 642 अंक या 1.73 फीसदी कमजोर हुआ था। सबसे बड़ी गिरावट 3 सितंबर को दर्ज की गयी। इस दिन सेंसेक्स 770 अंक या 2.06 फीसदी नीचे आया। इसके पीछे भारतीय अर्थव्यवस्था के 6 सालों के निचले स्तर पर फिसलने, ऑटो सेक्टर की बिक्री में गिरावट, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और कमजोर वैश्विक रुझान मुख्य कारण थे।

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