Stock Market Fall: भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का दौर जारी है. आज 13 जनवरी को लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की जा रही. कारोबारी सेशन में सेंसेक्स 76,535 तक फिसला. इसी तरह निफ्टी भी 23172 का लो बनाया. इसके अलावा ब्रॉडर मार्केट में भी तेज करेक्शन देखने को मिला. शुरुआती कारोबार में बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्सेज में 2 फीसदी तक की गिरावट देखी गई.
निवेशकों को हुई भारी नुकसान
शेयर बाजार में गिरावट के चलते सोमवार को शुरुआती ट्रेड में बीएसई का कुल मार्केट कैप करीब 5 लाख करोड़ रुपए घट गए. बता दें कि बाजार में लगातार 4 दिनों से बिकवाली जारी है. इसके चलते कुल मार्केट में करीब 17 लाख करोड़ रुपए की कमी दर्ज की गई. बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 424.54 लाख करोड़ रुपए पर फिसल गया. 7 जनवरी को बाजार हरे निशान में बंद हुआ था. तब कुल मार्केट कैप 441.75 लाख करोड़ रुपए था.
बाजार पर दबाव बना रहे ये फैक्टर्स
भारतीय रुपए का लगातार गिरना बाजार पर दबाव बनाने का काम कर रहा. यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 86.27 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गया. रुपए का यह कमजोर होना कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से जुड़ा हुआ है. नतीजतन, इसकी वजह से विदेशी निवेश लगातार बाहर जा रहा.

भारतीय बाजारों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर से बड़ी संख्या में भारतीय इक्विटी से निकासी की है. इस बड़े पैमाने पर बिकवाली के लिए बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, मजबूत अमेरिकी डॉलर और भारतीय शेयरों के ज्यादा वैल्युएशंस जैसे फैक्टर्स अहम है.
इन इवेंट्स पर बाजार की नजरें
- अमेरिकी बैन की वजह से चीन और भारत को रूसी कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के कारण तेल की कीमतें तीन महीने के हाइएस्ट लेवल पर पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई के दबाव को बढ़ावा देकर भारत की इकोनॉमी पर निगेटिव असर पड़ा है.
- 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के साथ ही हाई टैरिफ लगाए जाने की अटकलें बढ़ रही हैं, जिससे बाजार का ट्रेंड और भी ज्यादा खराब हो सकती है.
- केंद्रीय बजट 2025 की पर भी बाजार की नजर है. दरअसल, इसे लेकर मार्केट में टेंशन है कि पॉप्युलिस्ट बजट बाजार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा तो हलचल मच जाएगी.
- मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और महंगाई संबंधी चिंताओं के कारण 2025 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं.
- तीसरी तिमाही में केवल चुनिंदा क्षेत्रों में ही मामूली सुधार की उम्मीद है, चौथी तिमाही तक महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद है.
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