Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार आज 20 दिसंबर को लगातार 5वें कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुए. इंट्राडे में भारी गिरावट देखने को मिला. इस दौरान सेंसेक्स में करीब 1,200 अंकों की गिरा. दरअसल, इस गिरावट की असली वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से आगे ब्याज दरों में संभावित कटौती की धीमी घोषणा के बाद आई. अंत में सेंसेक्स 1.49% की गिरावट के साथ 78,041 पर और निफ्टी 50 इंडेक्स 1.52% की गिरावट के साथ 23,587 पर बंद हुए.
निवेशकों का भारी नुकसान
मार्केट की तेज बिकवाली में निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है. इस हफ्ते कुल लिस्टेड मार्केट कैप करीब 19 लाख करोड़ रुपए घटा है. आज शुक्रवार को मार्केट कैप करीब 9 लाख करोड़ रुपए घटा है, जोकि 441 लाख करोड़ रुपए हो गया है. गुरुवार को मार्केट क्लोज होने पर मार्केट कैप 450 लाख करोड़ रुपए था. जबकि 13 दिसंबर को मार्केट कैप 459 लाख करोड़ रुपए था.
अमेरिकी फेड के ब्याज दर कटौती का असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया फैसले ने वैश्विक बाजारों को काफी प्रभावित किया है. 18 दिसंबर को दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की गई, लेकिन भविष्य में कटौती के लिए अपने आउटलुक को बदल दिया. अब वे 2025 के अंत तक केवल दो और तिमाही-प्रतिशत अंकों की कटौती की उम्मीद करते हैं, जो बाजार के अनुमान से कम है.

फॉरेन कैपिटल का आउटफ्लो और रुपए में गिरावट
डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय इक्विटी से निकासी कर रहे हैं. चार सेशन में एफआईआई ने ₹12,000 करोड़ से अधिक प्राइस के भारतीय शेयर बेचे. इसके अलावा भारतीय रुपया 85.34 प्रति डॉलर के ऑल टाइम लो पर फिसल गया, जिससे विदेशी निवेश हतोत्साहित हुआ और कैपिटल का ज्यादा आउटफ्लो हुआ.
सेक्टर लॉस और मार्केट सेंटीमेंट
एनएसई पर आज कई सेक्टोरल इंडेक्स में भारी गिरावट देखी गई, जिनमें रियल्टी, पीएसयू बैंक, आईटी, मेटल, मीडिया, ऑटो और बैंक सेक्टर शामिल हैं. ये गिरावट बाजार में बिकवाली में योगदान देने वाले विभिन्न फैक्टर्स से प्रेरित थी.
Capitalmind Research के सीनियर रिसर्च एनलिस्ट कृष्ण कपाला ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर बिकवाली के कारण बाजारों में सुस्ती का दौर रहा. यह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से आगे दरों में कटौती की रफ्तार धीमी रहने के अनुमान का असर है. इसके चलते अमेरिकी शेयर बाजारों में करेक्शन देखने को मिला, जिसमें डाओ जोन्स 4% और नैस्डैक 100 2.5% गिर गया.
उन्होंने कहा कि कई फैक्टर्स मौजूदा मार्केट सेंटीमेंट को शेप दे रहे हैं. जनवरी में डोनाल्ड ट्रम्प के पदभार ग्रहण करेंगे. इसके अलावा भारत का केंद्रीय बजट पेश होगा. साथ ही FY25 की तीसरी तिमाही के नतीजे जारी होंगे.
ब्रॉडर आर्थिक चिंताएं और आय अनिश्चितता
भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति ने भी बाजार की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है. नवंबर में रिकॉर्ड उच्च व्यापार घाटा और धीमी आर्थिक वृद्धि ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. सरकारी खर्च और बेहतर फसल सीजन के कारण वित्तीय वर्ष के अंत में आय में सुधार की उम्मीदों के बावजूद, पिछली तिमाहियों में कमजोर कॉर्पोरेट आय ने सतर्कता का माहौल बना दिया है.
मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि मार्केट इस सतर्क माहौल में हम नए जमाने की प्लेटफॉर्म-बेस्ड आईटी कंपनियों पर पॉजिटिव ग्रोथ का अनुमान जता रहे हैं. हालांकि, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और नीतिगत जोखिमों के इस दौर में संतुलित निवेश रणनीति की सलाह दी जाती है.
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