Stock Market Crash: सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स करीब 2500 अंक तक गिर गया। वहीं, निफ्टी 23,725 अंक तक लुढ़क गया। United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखने लगा है। मध्य-पूर्व में हालात बिगड़ने और Strait of Hormuz से तेल आपूर्ति पर खतरे के कारण कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।

इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। कारोबार शुरू होते ही BSE Sensex और Nifty 50 तेज गिरावट के साथ खुले। लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई।
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डॉ. वीके विजयकुमार, चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुताबिक ब्रेंट क्रूड $115 से ऊपर चला गया है, जिससे इकॉनमी और मार्केट को बड़ा ऑयल शॉक लगा है। अगर वेस्ट एशियन झगड़ा लंबे समय तक चलता है और क्रूड की कीमत ऊंची रहती है, तो इंडिया जैसे बड़े ऑयल इंपोर्टर्स को भारी नुकसान होगा। मार्केट इस ऑयल शॉक के इकॉनमिक नतीजों का अंदाज़ा लगाएगा। महंगाई निश्चित रूप से बढ़ेगी, चाहे ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर कंज्यूमर्स पर पड़े या नहीं।
अभी यह पता नहीं है कि झगड़ा कब तक चलेगा। यह अनिश्चितता FIIs पर भी भारी पड़ेगी, जो फरवरी में थोड़ी खरीदारी के बाद फिर से इंडिया में एग्रेसिव सेलर बन गए हैं।
इतिहास से सबक यह है कि झगड़े जैसे जियोपॉलिटिकल मुद्दों का मार्केट पर असर लंबे समय तक नहीं रहता। इसलिए, इन्वेस्टर्स को सब्र रखना होगा।
बैंकिंग और फाइनेंशियल्स, ऑटोमोबाइल्स, टेलीकॉम और सीमेंट जैसे डोमेस्टिक कंजम्पशन सेगमेंट पर इस संकट का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। डिफेंस और फार्मास्यूटिकल्स काफी हद तक मजबूत रहेंगे। ज्यादा रिस्क लेने की क्षमता वाले लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स इन मजबूत थीम वाले स्टॉक्स में पैसा लगा सकते हैं।
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