Share Market Crash Reasons: आज शेयर मार्केट में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। सेंसेक्स 1070 अंक नीचे फिसलकर 79,160 के करीब ट्रेड कर रहा है और निफ्टी 350 अंक गिरकर 23,925 के पास कारोबार कर रहा है।बाजार में आई इस भारी गिरावट के पिछे कुछ मुख्य कारण है। चलिए इनके बारे में आपको बताते हैं।

FIIs की बिकवाली
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर महीने में FIIs कुल मिलाकर नेट सेलर्स (ज्यादा बेचने वाले) रहे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की खरीदारी भी पहले जैसी मजबूत नहीं रही। यह भी एक वजह है कि भारतीय बाजार ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पा रहा। डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी के चलते एफपीआई भारतीय बाजार में आक्रामक तरीके से खरीदारी करने से बच रहे हैं।
ट्रंप की इंपोर्ट ड्यूटी की बात
दैनिक जागरण के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने ये बात कही है कि वह राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के पहले दिन ही चीन, मैक्सिको और कनाडा से सभी आयात पर टैरिफ लगाएंगे। इसमें मैक्सिको और कनाडा से आने वाले सभी सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ और चीन पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ शामिल है। ज्यादा टैरिफ से अमेरिका में महंगाई भी बढ़ेगी और ब्याज दरों में कटौती की संभावना धूमिल होगी। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में अधिक उछाल आने की आशंका है।
वैश्विक संकेत की कमी के कारण
अमेरिकी शेयर बाजार की छुट्टी के कारण भारतीय बाजारों में कोई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय ट्रिगर नहीं दिखा और पहले देखी गई तेजी अमेरिकी इक्विटी में पॉजिटिव गति से प्रेरित थी। हालांकि, नए घटना की अनुपस्थिति ने निवेशकों के बीच मुनाफावसूली को बढ़ावा दिया।
केंद्रीय बजट में अनिश्चितता
केंद्रीय बजट के करीब आने के साथ, डीआईआई प्रतीक्षा और निगरानी मोड में बने हुए हैं। विश्लेषकों का सुझाव है कि हाल ही में संपन्न महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों ने सत्तारूढ़ सरकार को आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने का विश्वास दिलाया है, लेकिन विशिष्ट बजट उपायों पर अनिश्चितता ने संस्थागत निवेशकों को किनारे कर दिया है।
ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम
नभरात टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में कटौती पर फैसला होगा। अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों के मुताबिक ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है। क्योंकि अमेरिकी उपभोक्ता खर्च अक्टूबर में बढ़ गया है।


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