Stock Market Crash Reason: शेयर बाजार में मची हलचल में निवेशकों को भारी नुकसान हो रहा. सितंबर 2024 से अब तक इनवेस्टर्स को करीब 40 लाख करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है. क्योंकि सितंबर में सेंसेक्स और निफ्टी रिकॉर्ड हाई से अब तक करीब 15-17% फिसल चुके हैं. दरअसल, भारतीय शेयर बाजारों में जारी इतनी लंबी गिरावट से पिछले 28 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है. क्योंकि 1996 में इतनी लंबी बिकवाली देखने को मिली थी. घरेलू बाजार में बिकवाली का सबसे बड़ा ट्रिगर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली है.
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली!
शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों ने जमकर बिकवाली की है. डिपॉजिटरीज के आंकड़ों के मुताबिक फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPIs) ने फरवरी में 34574 करोड़ रुपए के शेयरों की बिकवाली की है. उससे पहले जनवरी में 78027 करोड़ रुपए के शेयरों की बिकवाली की थी. यानी 2025 के 2 महीने में विदेशी निवेशकों ने 1.12 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं.
जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि विदेशी निवेशकों का फोकस भारत में बिकवाली करने पर है. इसकी वजह हाई वैल्युएशंस हैं. FPIs भारत से पैसा निकाल करके चीन के बाजार में डाल रहे, जहां शेयर कम वैल्युएशंस पर मिल रहे. लेकिन इस दौरान विदेशी निवेशक बेस्ट परफॉर्मिंग सेक्टर में बिकवाली कर रहे, जोकि आकर्षक वैल्युएशंस वाले हैं. इसमें फाइनेंशियल सर्विसेज में भारी बिकवाली कर रहे.
बजट में कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को देश का बजट पेश किया. पर्सनल टैक्स को लेकर बड़ी राहत दी, जिसमें 12 लाख रुपए तक की इनकम को टैक्स फ्री करने का ऐलान किया. इसके पहले वित्त मंत्री ने 2024 के बजट में शेयर बाजार से जुड़े टैक्स को लेकर भी कुछ बदलाव का ऐलान किया था. इसके तहत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को 10% से बढ़ाकर 12.5% कर दिया है. साथ ही शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स को 15% से बढ़ाकर 20% कर दिया गया.

कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव FPIs को नहीं भा रहा?
शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक हेलियस कैपिटल के फाउंडर और चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) समीर अरोड़ा ने कैपिटल गेन टैक्स में हुए बदलाव को एक इवेंट में चर्चा की. उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड के एक इवेंट में सरकार के इस फैसले को बड़ी गलती करार दिया. आगे कहा कि कैपिटल गेन टैक्स बढ़ने की वजह से ही विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली देखने को मिल रही. समीर अरोड़ा ने कहा कि दुनिया के 200 में से 199 देशों में शेयर बाजार में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों पर कोई टैक्स नहीं लगता.
समीर अरोड़ा के इस बयान से इवेंट में शामिल कोटक महिंद्रा एएमसी के मैनेजिंग डायरेक्ट नीलेश शाह बिल्कुल सहमत नहीं दिखे. उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि कम कैपिटल गेन टैक्स से निवेशकों की वापसी हो सकती है. लेकिन केवल टैक्स में कटौती कोई गारंटी नहीं कि फॉरेन इनवेस्टर्स वापस आ जाएंगे. FPIs को अन्य तरीकों से आकर्षित करने की जरूरत है.
FIIs और मार्केट का सम्मान करना चाहिए
समीर अरोड़ा ने अपने बयान में कहा कि पिछले 7 सालों में भारतीय शेयर बाजारों में करीब 12% की बढ़त दर्ज की गई. जबकि हर साल डॉलर टर्म (प्री-टैक्स) में 7-8% उछला. 2022-23 में भारत सरकार ने कैपिटल गेन टैक्स से 99000 (10 अरब डॉलर) करोड़ रुपए वसूले. यह सालाना आंकड़ा नहीं है. लेकिन यह स्टॉक मार्केट सायकल का पीक रहा. 5 या 7 ईयर सायकल में हम केवल एक साल का आंकड़ा देख रहे. अन्य सालों में यह केवल 2-3 अरब डॉलर रहा. उन्होंने आगे कहा कि सरकार को मार्केट और विदेशी निवेशकों का सम्मान करना चाहिए.
कैपिटल गेन टैक्स क्या है और कब आया?
सबसे पहले यह समझिए है कि कैपिटल गेन टैक्स क्या है, तो यह वह टैक्स है जिसमें किसी भी असेट यानी शेयर, प्रॉपर्टी या सोने के बेचने पर प्रॉफिट पर टैक्स लगाया जाता है. कैपिटल गेन टैक्स 2 टाइप का होता है, जिसमें लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स और शॉर्ट टर्म गेन टैक्स शामिल हैं. कैपिटल गेन टैक्स को पहली बार 1946-47 में पेश किया गया था, लेकिन तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णमाचारी ने 1956 में इसे पर्मानेंट कर दिया था. उस दौरान


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