Stock Market Crash:भारतीय शेयर बाजार फिर से ट्रेंड बदलता दिखाई दे रहा है आज आई जबरदस्त गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। हफ्ते की शुरुआत ही भारी दबाव के साथ हुई, जहां बाजार में घबराहट और अनिश्चितता साफ तौर पर देखने को मिली। ग्लोबल संकेतों की कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने मिलकर बाजार के सेंटीमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया।

सुबह के शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 1,600 अंकों तक टूट गया, जबकि Nifty 50 भी 23,600 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया। सुबह 9:35 बजे के आसपास सेंसेक्स 1,540 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ 76,000 के करीब ट्रेड करता दिखा, वहीं निफ्टी भी करीब 465 अंकों की कमजोरी के साथ 23,584 के स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारणों का नतीजा है।
ईरान-अमेरिका बातचीत बेनतीजा-
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा। इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही, जिसके बाद हालात और बिगड़ते नजर आए। Donald Trump ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने तक की चेतावनी दे दी, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई। यह वही मार्ग है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है, और किसी भी रुकावट का सीधा असर सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल-
इसी का असर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के रूप में दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत करीब 7% उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी 80% से ज्यादा तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, यह स्थिति काफी चिंताजनक है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने, राजकोषीय घाटा बढ़ने और आर्थिक विकास पर असर पड़ने का खतरा रहता है।
रुपये में कमजोरी-
तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा। रुपया 55 पैसे कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 93.28 पर खुला, जो पिछले सत्र के मुकाबले जोरदार गिरावट को दिखाता है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित करता है, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ जाता है।
ग्लोबल मार्केट में गिरावट-
वहीं, ग्लोबल बाजारों से भी कमजोर संकेत ही मिले। एशियाई बाजारों में गिरावट का माहौल रहा, जापान का निक्केई, साउथ कोरिया का कोस्पी और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 सभी दबाव में दिखे। अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में भी कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। घरेलू स्तर पर बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। बैंक निफ्टी और ऑटो सेक्टर में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
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