Stock Market Crash: शेयर बाजार में आज 27 जनवरी को तेज करेक्शन देखने को मिल रहा है. ग्लोबल संकेतों, कॉर्पोरेट अर्निंग में कमी और फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली से घरेलू बाजारों पर दबाव बै. यही वजह है कि कारोबारी हफ्ते की आज कमजोर शुरुआत हुई है. लगातार दूसरे दिन सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट देखने को मिल रही. बाजार में सबसे ज्यादा गिरावट बैंकिंग और आईटी सेक्टर में है. ब्रॉडर मार्केट में सबसे ज्यादा करेक्शन देखने को मिल रहा है. कारोबारी सेशन में बीएसई मिडकैप में 3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई.
क्यों टूट रहा शेयर बाजार?
SMC Global Securities की सीनियर रिसर्च एनलिस्ट (इक्विटी फंडामेंटल) सीमा श्रीवास्तव ने कहा कि इस गिरावट के पीछे ग्लोबल और डोमेस्टिक कारणों का मिश्रण है. घरेलू बाजारों में से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने लगातार बिकवाली की है, जिन्होंने जनवरी में भारतीय बाजार से 69,000 करोड़ रुपए निकाले हैं. जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 67,000 करोड़ रुपए की खरीार की. बाजार से FIIs की लगातार बिकवाली ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है, खासकर जब निफ्टी 50 इंडेक्स 23,000 के अहम लेवल से नीचे फिसल गया.
उन्होंने बताया कि इसके अलावा वैश्विक अस्थिरताओं ने भी निगेटिव सेंटीमेंट को बढ़ाया है. US फेडरल रिजर्व का आने वाला मौद्रिक नीति निर्णय और कोलंबिया, कनाडा और मेक्सिको के साथ बढ़ती ट्रेड टेंशन ने वैश्विक आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं पैदा की हैं. इनवेस्टर्स लिक्वडिटी के सख्त होने और ग्लोबल ट्रेड में अड़चन को लेकर सतर्क हैं.
सीमा श्रीवास्तव ने कहा कि बजट 2025 के पहले निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली हो रही. दरअसल, इनकम टैक्स में कटौती या अन्य प्रोत्साहन जैसी मौद्रिक उपायों को लेकर अनिश्चितता है, जिससे बाजार में घबराहट बढ़ गई है. वहीं, तिमाही नतीजे भी निराशाजनक रहे हैं, जिससे ओवरऑल कमजोरी बढ़ी है.
आगे भी जारी रहेगी बिकवाली?
मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि चीन की AI टेक्नोलॉजीज सेक्टर में डेवलपमेंट प्रगति को लेकर ग्लोबल कंपिटीशन की चिंताओं ने IT सेक्टर में सतर्कता को बढ़ाया है. गिरते हुए कच्चे तेल की कीमतों ने भी निगेटिव सेंटीमेंट को बढ़ावा दिया है. सीमा श्रीवास्तव ने कहा कि बाजार तब तक अस्थिर रहेगा जब तक केंद्रीय बजट और RBI की मौद्रिक नीति पर ज्यादा स्पष्टता नहीं मिलती. अगर बजट निराशाजनक रहा, तो और बिकवाली हो सकती है, जबकि पॉजिटिव ऐलानों से राहत का संकेत दे सकती हैं.

घरेलू इंडेक्स पर ग्लोबल मार्केट का असर
अमेरिकी शेयर वायदा और अधिकांश एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेशकों ने चीनी स्टार्टअप डीपसीक के ओपनएआई के चैटजीपीटी के साथ कंपीट करने के लिए एक मुफ्त एआई मॉडल के लॉन्च के प्रभाव का आकलन किया. नैस्डैक कंपोजिट वायदा लगभग 2 फीसदी गिर गया, और एसएंडपी 500 वायदा 1 फीसदी गिर गया. जापान का निक्केई पहले की बढ़त को खत्म करने के बाद 0.3 फीसदी गिर गया. न्यूजीलैंड के बेंचमार्क इंडेक्स में 0.6 फीसदी की गिरावट आई.
आगे किन सेक्टर्स और स्टॉक्स में बनेगा पैसा?
सीमा श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय बाजार में मार्केट करेक्शन के दौरान निवेशकों को उन सेक्टर्स और स्टॉक्स पर फोकस करना चाहिए. इसमें डिफेंसिव सेक्टर्स जैसे फार्मास्युटिकल्स, होटल्स, क्यूएसआर (क्विक सर्विस रेस्टोरेंट) और हेल्थकेयर अच्छे प्रदर्शन करते हैं. क्योंकि ये सेक्टर्स आवश्यक उत्पाद और सेवाएं प्रदान करते हैं. इन सेक्टर्स में Jubilant Foodworks, Devyani International, Lemon Tree, Indian Hotels, Narayana Hrudalaya, IPCA Laboratories और Aurobindo Pharmaceuticals जैसी कंपनियों के शेयर लॉन्ग टर्म के लिए टॉप पिक रहेंगी.
मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि मौजूदा मार्केट कंडीशन में कंज्यूमर स्टेपल्स जैसे Dabur India, Adani Wilmar, और Varun Beverages के शेयरों को पिक कर सकते हैं. इसके अलावा यूटिलिटी सेक्टर में NTPC, Power Grid, और Coal India भी अच्छे लग रहे हैं. निवेश के लिहाज से लार्ज,ब्लू-चिप स्टॉक्स खासकर जो रेगुलरली डिविडेंड देते हैं, वे करेक्शन में सेफ ऑप्शन हो सकते हैं.
गोल्ड-सिल्वर पर भी करें फोकस
सीमा श्रीवास्तव ने कहा कि मार्केट में एक और एसेट क्लास जिसे करेक्शन के दौरान फोकस में रखना चाहिए, वह है सोना और प्रीसियस मेटल्स, जो पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माने जाते हैं. निवेशक इसके लिए म्यूचुअल फंड्स या Muthoot Finance जैसे गोल्ड-बैक्ड स्टॉक्स पर विचार कर सकते हैं. साथ ही आईटी स्टॉक्स में सिलेक्टिव निवेश कर सकते हैं, जिसमें खासकर क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़े शेयरों पर नजर रखा जा सकता है.


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