नयी दिल्ली। अगर आप कोरोनावायरस के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को हो रहे नुकसान को जानना चाहते हैं तो हम आपको यहां कुछ आंकड़े बताते हैं। सबसे पहले तो बता दें कि कोरोनावायरस ने शेयर बाजार में जो तबाही मचाई है उससे निवेशकों को 52 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी है। ये बीते वित्त वर्ष के के लिए भारत की जीडीपी के आकार का करीब 40 फीसदी है। बता दें कि 31 दिसंबर 2019 को बीएसई की कुल लिस्टेड कंपनियों की मार्केट कैप 155.53 लाख करोड़ रुपये थी, जो 23 मार्च तक गिर कर 103 लाख करोड़ रुपये की रह गयी। यह नुकसान वित्त वर्ष 2019-20 के लिए संशोधित 7.67 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य का करीब 7 गुना है। अन्य आंकड़ों से मिलाएं तो इतनी दौलत सरकार के चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित प्राप्तियों के तीन गुना और अगले वित्त वर्ष के लिए अनुमानित कुल खर्च की दोगुनी है।

कई देशों की जीडीपी से अधिक नुकसान
सोमवार को शेयर बाजार में हुई बिकवाली से निवेशकों की संपत्ति में 14.22 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आयी, जो अलजीरिया और अन्य 130 देशों की जीडीीप से अधिक है। सोमवार का दिन शेयर सूचकांकों के लिए इतिहास का सबसे खराब दिन रहा। निफ्टी 1135 अंक टूट कर 4 सालों के निचले स्तर 7610 पर पहुंच गया और सेंसेक्स 3935 अंकों की गिरावट के साथ 25981 अंक पर आ गया। जानकारों ने निफ्टी के 7200-6200 तक गिरने का अनुमान लगाया है। इस समय स्थिति 2008 में शेयर बाजारों में आई गिरावट की झलक है।
सूचकांकों में 37 फीसदी की गिरावट
44 सत्रों में बेंचमार्क सूचकांकों में 37 फीसदी की गिरावट आयी है, यानी महज 44 दिनों की देश की वार्षिक जीडीपी के 40 फीसदी के बराबर संपत्ति डूब गई। इससे पहले 2008 में 200 सत्रों में बेंचमार्क सूचकांक 66 फीसदी और 2011 में 275 दिनों में 28 फीसदी नीचे गिरा था। बता दें कि बाजार में लार्ज कैप शेयरों में 25.96 लाख करोड़ रुपये और मिड तथा स्मॉल कैप शेयरों में 7-7 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आयी है। वहीं देश के अमीर कारोबारियों की संपत्ति देखें तो प्रमुख 14 अरबपतियों की संपत्ति में इस साल अब तक 4 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आयी है, जिनमें टॉप 2 ने 1.85 लाख करोड़ रुपये गंवाए हैं।


Click it and Unblock the Notifications