Sri Lanka Crisis : 500 रु तक पहुंचे प्याज, मूली और आलू के दाम, जनता बेहाल

नई दिल्ली, जुलाई 13। श्रीलंका में अभी सब्जियोेंं के दाम 500 रुपये तक पहुच गये हैं। हमारा पड़ोसी देश श्रीलंका की पिछले कुछ महीनों से बेहद खराब है। आर्थिक मोर्चे पर समस्या से शुरू हुआ संकट अब राजनीतिक अस्थिरता के हालात पैदा कर चुका है। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। हजारों लोगों की भीड़ ने पिछले कई दिनों से राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा जमा रखा है, सड़कों पर सेना तैनात है और राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री सहित सभी बड़े नेता अंडरग्राउंड हो गए हैं। इस बीच श्रीलंका में खाने-पीने की जरूरी चीजों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं।

हालात बहुत ही ज्यादा खराब होते जा रहे हैं

हालात बहुत ही ज्यादा खराब होते जा रहे हैं

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के फोस मार्केट के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अभी टमाटर के रेट 150 प्रति रुपये किलो श्रीलंकाई रुपये पर पहुंच गए हैं। इसी तरह मूली के भाव 490 रुपये प्रति किलो हो चुके हैं। साथ ही प्याज 200 रुपये और आलू 220 रुपये किलो में बिक रहा है। प्याज, आलू और टमाटर जैसी सब्जियों के दाम बढ़ने से श्रीलंका के लोगों की परेशानियां भी बढ़ गई हैं। पहले से ही श्रीलंका में डीजल-पेट्रोल की कमी हो चुकी है और लोगों को बहुत ज्यादा बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

इस तरह बढ़ता गया संकट

इस तरह बढ़ता गया संकट

ये सारी समस्या विदेशी कर्ज के कारण शुरु हुई। कर्ज चुकाते-चुकाते श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया। हालात ऐसे हो गए कि श्रीलंका में खाने-पीने की चीजों की कमी हो गई। बेहद जरूरी दवाएं तक पड़ोसी देश में समाप्त हो गईं। सरकार को पेट्रोल पंपों पर सेना तैनात करने की जरूरत पड़ गई। इससे भी हालात में सुधार नहीं आया और स्तिथि निरंतर बिगड़ते चले गए। आजादी के बाद श्रीलंका के सामने यह अब तक का सबसे बड़ा संकट है।

श्रीलंका के हालात इतने बुरे हो चुके हैं

श्रीलंका के हालात इतने बुरे हो चुके हैं

श्रीलंका में खाने-पीने के सामान और दवा जैसी बुनियादी चीजों की भी कमी होने लगी है। लोग एलपीजी सिलेंडर खरीदने के लिए लम्बी लाइनों में लगे हुए हैं। हजारों-लाखों लोग सड़कों पर हैं। आर्थिक संकट में देश को झोंकने के लिए लोग राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। लोगों का गुस्सा जब सड़कों पर फूटा तो मई में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री बनाया गया था, लेकिन अब वह भी पद छोड़ चुके हैं।

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