नई दिल्ली, अप्रैल 12। हफ्तों की आर्थिक उथल-पुथल के बाद भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका ने मंगलवार को घोषणा की कि इसके पास आयात के लिए विदेशी मुद्रा खत्म हो रही है। इसके चलते श्रीलंका ने अपने पूरे विदेशी डेब्ट (51 अरब डॉलर) पर डिफॉल्ट होने का ऐलान किया है। कोलंबो ने इस कदम को "अंतिम उपाय" कहा है। श्रीलंका इस समय अपनी आजादी के बाद से सबसे बुरे आर्थिक मंदी के दौर से जूझ रहा है, जिसके चलते लोगों को नियमित रूप से ब्लैकआउट और भोजन और ईंधन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
क्या बोला वित्त मंत्रालय
श्रीलंका के वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि विदेशी सरकारों सहित सारे लेनदार श्रीलंकाई रुपये में भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं। मौजूदा संकट ने श्रीलंका के 2.2 करोड़ों लोगों के लिए बड़ी चुनौती ला खड़ी की है। हफ्तों से देश में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने पिछले साल श्रीलंका की रेटिंग डाउनग्रेड यानी घटा दी थी, जिससे देश को विदेशी पूंजी बाजारों तक एक्सेस से रोक दिया गया, जिससे आयात की फाइनेंसिंग के लिए जरूरी लोन जुटाया जा सकता था।
भारत-चीन से मदद की गुहार
श्रीलंका ने भारत और चीन से डेब्ट रिलीफ की मांग की थी, लेकिन दोनों देशों ने इसके बजाय इनसे वस्तुओं को खरीदने के लिए अधिक लोन की पेशकश की। श्रीलंका के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि देश की वित्तीय स्थिति में और गिरावट को रोकने के लिए सरकार केवल अंतिम उपाय के रूप में आपातकालीन उपाय कर रही है। दक्षिण एशियाई राष्ट्र के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से सहायता प्राप्त वसूली कार्यक्रम से पहले "सभी लेनदारों के निष्पक्ष और समान व्यवहार" को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल डेब्ट डिफॉल्ट का कदम उठाया गया।
चीन ने फंसाया
बता दें कि श्रीलंका ने बीते सालों में डेवलपमेंट के लिए चीन से भारी कर्ज लिया। पर अब हालात ऐसे हो गए कि श्रीलंका के पास चीन का कर्ज चुकाने के पैसे नहीं हैं। माना जा रहा है कि इसी स्थिति का चीन फायदा उठाना चाहता है। चीन श्रीलंका के अहम और सैन्य लिहाज से महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जा जमाना चाहता है। श्रीलंका में आर्थिक हालात काफी खराब हैं। श्रीलंका ईंधन खरीदने में पूरी तरह से असमर्थ है। देश में महंगाई दर काफी ज्यादा बढ़ गई है। इसीलिए चावल की कीमत 300 रुपये किलो तक पहुंच गयी है। लोग 100-100 ग्राम दूध खरीदने के लिए मजबूर हैं। पहले से ही विदेशी कर्ज के बोझ में दबे श्रीलंका की आर्थिक स्थिति कोरोना महामारी ने और ज्यादा खराब कर दी।


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