Soybean MSP Purchase News: केंद्र सरकार ने सोयाबीन की फसल उगाने वाले किसानों के लिए बड़ा ऐलान लिया है. इस फैसले से कई हजार किसानों को फायदा होने वाला है. केंद्र सरकार ने यह ऐलान किया है कि अब देश के तीन राज्यों में सोयाबीन की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में होगी. इन तीन राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना शामिल है.

सोयबीन की खेती करने वालों के लिए बड़ी खबर है. अब देश के तीन राज्यों में किसान सोयबीन एमएसपी (MSP) में बेच सकेंगे. केंद्र सरकार के इस फैसले से महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के किसानों को बड़ा फायदा होने वाला है.
देश में सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों की लंबे समय से यह शिकायत थी कि सोयाबीन को एमएसपी से कम दाम खरीदा जा रहा है.
केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद अब सोयाबीन को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर खरीदा जाएगा. दूसरे शब्दों में कहे तो केंद्र सरकार ने देश के तीन राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलांगाना में एमएसपी पर सोयाबीन की खरीद का ऐलान किया है.
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक सोयबीन MSP में 91% की बढ़ोतरी हुई है. यह पता चला है कि वित्त वर्ष 2013-14 में सोयाबीन एमएसपी ₹2,560 प्रति क्विंटल थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर ₹4,892 प्रति क्विंटल हो गई है.
सरकार ने यह फैसला किसानों की हित में लिया है. इसके अलावा सरकार चाहती है कि किसानों को वित्तीय सुरक्षा मिलें. इन तीन राज्यों में अब कोई भी तय एमएसपी के नीचे सोयाबीन नहीं खरीद पाएगा. इसे किसानों को भी एक फिकस इनकम मिलेगी और वित्तीय संकट से राहत मिलेगी.
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने केंद्रीय नोडल एजेंसियों को मूल्य समर्थन योजना यानी PSS के तहत सोयबीन एमएसपी से संबंधित निर्देश दिए हैं.
मध्यप्रदेश खो सकता है सोयाबीन राज्य का खिताब
मध्यप्रदेश में देश का लगभग आधा सोयाबीन उगता है. राज्य के किसानों की यह शिकायत है कि सोयाबीन को पिछले साल से काफी कम दाम में खरीदा जा रहा है. संयुक्त किसान मोर्चा ने यह बताया कि पिछले अगस्त को सोयाबीन की खरीद 4450 से 4750 रुपये प्रति क्विंटल हुआ करती थी. लेकिन इस साल अगस्त में इसे 3500 रुपये से 4000 रुपये में बेचा जा रहा है.
किसान ने अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा भी लिया है. किसानों की ये मांग है कि सरकार सोयाबीन की कीमत 6000 से 8000 रुपये प्रति क्विंटल कर दें.
हालांकि यह ध्यान देने वाली बात है कि केंद्र सरकार के इस फैसले का लाभ सिर्फ तीन राज्यों में ही मिलेगा. सरकार के इस फैसले से मध्य प्रदेश के किसानों की समस्या खत्म नहीं होगी.


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