SGB Series I 2016-17: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या एसजीबी सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं, जिसके लिए निवेशकों को होल्डिंग सर्टिफिकेट मिलता है। इसमें सोने में रेटेड गवर्नमेंट सिक्योरिटीज शामिल होती हैं, जिसमें निवेशकों को नकद में इश्यू प्राइस का भुगतान करना होता है। साल 2016 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में निवेश करने वाले निवेशकों को 122.44 फीसदी का रिटर्न मिलने जा रहा है।

इतना तय किया गया है फाइनल रिडेम्पशन प्राइस
RBI ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम का रिडेम्पशन प्राइस जारी कर दिया है। 5 अगस्त 2024 को रिडेम्पशन होने वाले 2016-17 सीरीज I वाले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का फाइनल रिडेम्पशन प्राइस 6938 रुपये प्रति ग्राम तय किया गया है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी और बॉन्ड की अवधि के दौरान ब्याज भुगतान दोनों के कारण निवेशक इस निवेश से पर्याप्त रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं।
रिडेम्पशन प्राइस और प्रॉफिट कैलकुलेशन
RBI ने SGB के लिए रिडेम्पशन प्राइस ₹6,938 प्रति ग्राम सोने पर निर्धारित किया है। यह प्राइस सोमवार, 29 जुलाई से शुक्रवार, 2 अगस्त 2024 तक सोने की कीमतों के सिंपल एवरेज के आधार पर निर्धारित किया गया है।
इस प्रकार रिटर्न को कर सकते हैं कैलकुलेट
इश्यू प्राइस और रिडेम्पशन प्राइस- बांड शुरू में ₹3,119 प्रति ग्राम पर जारी किए गए थे। अभी का रिडेम्पशन प्राइस ₹6,938 है, निवेशकों को इसमें ₹3,119 प्रति ग्राम का प्रॉफिट देखने को मिल सकता है।
एब्सोल्यूट रिटर्न की बात करें तो यह लाभ ओरिजनल इश्यू प्राइस से लगभग 122% का फुल रिटर्न होता है।
ब्याज को समायोजित करने पर, जो इसके लिए Initial Investment Amount पर अर्ध-वार्षिक रूप से पेऐबल 2.75% निर्धारित किया गया था, फुल रिटर्न 144% से थोड़ा अधिक होता है।
कैपिटल एप्रिसिएशन की बात करें तो इंवेस्टर्स एसजीबी से जुड़े इंटरेस्ट पेमेंट्स से भी फायदा मिलेगा। 2016-17 की सीरिज I ने इश्यू प्राइस के आधार पर अर्ध-वार्षिक रूप से देय 2.75% की ब्याज दर की पेशकश की है। इन ब्याज भुगतानों को ध्यान में रखते हुए, आठ सालों में फुल रिटर्न बढ़कर 144% से अधिक हो जाएगा।
इसके रिजल्ट ये होगा कि लगभग 12% सीएजीआर का एनुएल रिटर्न प्राप्त होता है, जो निवेश की लाभप्रदता को और बढ़ाता है।
एसजीबी में निवेश करने के फायदे
एसजीबी को भारत सरकार द्वारा समर्थित किया जाता है, जो न्यूनतम डिफ़ॉल्ट जोखिम का आश्वासन देता है। एसजीबी में अमाउंट मैच्योर होने पर मिलने वाला कैपिटल गेन टैक्स फ्री हो सकते है। इसके अलावा आपको मैच्योरिटी से पहले बांड को ट्रांसफर करने और इंडेक्सेशन लाभ प्राप्त करने की भी अनुमति है और अगर आप मैच्योरिटी के बाद बांड तोड़ते हैं, तो कैपिटल गेन टैक्स से भी छूट मिलती है।


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