Sovereign Gold Bond : जम कर बरसाया पैसा, 86 फीसदी तक दिया रिटर्न

नई दिल्ली, फरवरी 9। गोल्ड बॉन्ड सोने में निवेश करने का एक सुरक्षित और आसान तरीका है। सोने में निवेश के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (सीजीबी) को बेहतर माना जाता है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि जितने गोल्ड के लिए आप भुगतान करेंगे, वह पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। ये मुनाफा भी अच्छा कराते हैं। एसजीबी पिछले 5 सालों में 85 फीसदी से अधिक का मुनाफा करा चुके हैं। यह मुनाफा 14 जनवरी 2016 को जारी किए गए एसजीबी का है। 14 जनवरी 2016 को एसजीबी में गोल्ड बॉन्ड के इश्‍यू में कीमत 2,600 रुपये थी। 8 फरवरी तक इस बॉन्ड को प्रीमैच्योर (समय से पहले रिडीम) कराने पर 4,813 रुपये प्रति के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। यानी निवेशकों को सीधे-सीधे करीब 85 फीसदी हर यूनिट पर मुनाफा होगा।

ब्याज भी मिलता है

ब्याज भी मिलता है

एसजीबी पर एक और फायदा मिलता है और वो है निश्चित ब्याज का। एसजीबी पर 2.5 फीसदी ब्याज दर सालाना दी जाती है। मगर यह इनकम टैक्सेबल होती है। जितना भी ब्याज आपको मिलेगा वो अन्य सोर्स से इनकम के रूप में आपकी टैक्सेबल इनकम में शामिल होगा। मगर गोल्ड बॉन्ड पर ब्याज मिलता है, उस पर टीडीएस नहीं लगता। ये ब्याज आपको छमाही आधार पर दिया जाता है।

क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड

क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड

निवेश से पहले ये जानना है जरूरी है कि आखिर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड क्या होते हैं। ये सोना ही है, मगर पेपर फॉर्मेट में। आपको इसे फिजिकल गोल्ड की तरह स्टोर करने की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता। बॉन्ड पेपर को आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है। ये बॉन्ड्स आरबीआई की बुक्स में दर्ज या डीमैट फॉर्म में रखे जाते हैं। इसलिए जोखिम नहीं होता।

टैक्स को लेकर बड़ा फायदा

टैक्स को लेकर बड़ा फायदा

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का 8 साल का मैच्योरिटी पीरियड होता है। इसके बाद निवेशकों को जो रिटर्न मिलता है वो टैक्स फ्री रहता है। मगर यदि समय से पहले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योर कराया जाए तो अलग-अलग टैक्स रेट लागू होती है। पहली बात कि इन बॉन्ड्स का लॉक इन पीरियड 5 साल का होगा। इसके बाद और मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने से पहले यदि गोल्ड बॉन्ड की बिक्री की जाए तो मिलने वाले रिटर्न को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स माना जाएगा। आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स सेस और इंडेक्सेशन बेनिफिट्स के साथ 20 फीसदी की दर से लागू होगा।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स

दूसरा तरीका है कि आप 3 साल में बॉन्ड से बाहर निकलें तो उस स्थिति में आपका रिटर्न शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स माना जाएगा। फिर इसे आपकी सालाना आय में शामिल किया जाएगा और लागू टैक्स स्लैब के अनुसार आपको टैक्स देना होगा। पर 3 साल पूरे होने पर आप इन बॉन्ड्स को बेचते हैं तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स लगेगा, जो कि एडेड सेस और इंडेक्सेशन बेनिफिट्स के साथ 20 फीसदी है।

कहां से खरीदें गोल्ड बॉन्ड्स

कहां से खरीदें गोल्ड बॉन्ड्स

ये गोल्ड बॉन्ड बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, पोस्ट ऑफिर और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों, एनएसई और बीएसई पर बिकते हैं। पर ध्यान रहे कि स्मॉल फाइनेंस बैंक और पेमेंट्स बैंक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड नहीं बेच सकते। आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को किसी के साथ जॉइंट रूप से भी खरीद सकते हैं।

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