Sovereign Gold Bond: नवंबर 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना के साथ शुरू की गई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) का उद्देश्य लोगों को अपना सोना बैंकों में जमा करने के लिए प्रोत्साहित करना था।
इस पहल को व्यक्तियों को उनके सोने के जमा पर ब्याज अर्जित करने की इजाजत देकर सोने के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने घोषणा की है कि मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म GMS को 26 मार्च, 2025 से बंद कर दिया जाएगा।

बंद करने के कारण
योजना को बंद करने का फैसला बाजार की बदलती परिस्थितियों और इसके प्रदर्शन के कारण लिया गया है। इसके बावजूद बैंकों के पास अपने कॉमर्शियल हितों के आधार पर शॉर्ट टर्म गोल्ड जमा की पेशकश करने का विकल्प है। योजना की कठिनाई और जेवरों से इमोसनली संबंध अहम बाधाएं थीं। कई भारतीय अपने पारंपरिक गहनों से इमोसनली रूप से जुड़े हुए हैं, जिन्हें इस योजना के तहत पिघलाना पड़ा, जिससे भागीदारी में बाधा उत्पन्न हुई।
योजना के सामने चुनौतियां
सोने की जांच और जमा करने की प्रक्रिया बोझिल और समय लेने वाली थी। इसके अलावा, सीमित परीक्षण केंद्र उपलब्ध थे। प्रतिभागियों को अपनी होल्डिंग्स की घोषणा करने और अर्जित ब्याज पर कर का भुगतान करने की जरूरत का भी सामना करना पड़ा, जिसने कई लोगों को शामिल होने से डिसकरेज किया। इसके अलावा, बैंकों द्वारा जागरूकता और प्रचार की कमी ने इसकी सीमित सफलता में योगदान दिया।
वर्तमान निवेशकों पर असर
जो लोग पहले ही GMS में निवेश कर चुके हैं, वे निश्चिंत रहें कि योजना की अवधि समाप्त होने तक आपका सोना और अर्जित ब्याज सुरक्षित रहेगा। हालांकि, इस योजना के तहत भविष्य में मध्यम या लॉन्ग टर्म जमा में निवेश करना संभव नहीं होगा। कुछ बैंक अभी भी अपने विवेक पर शॉर्ट टर्म जमा विकल्प प्रदान कर सकते हैं।
भारतीय घरों में सोना
भारत में घरों में आभूषण सिक्के और बिस्किट के रूप में लगभग 30,000 टन सोना है। इस धन का अधिकांश हिस्सा बिना किसी आय या आर्थिक योगदान के अलमारी या लॉकर में बेकार पड़ा रहता है। जीएमएस ने इस पेसिव ऐसेट को जुटाने की कोशिश की लेकिन अलग-अलग चुनौतियों के कारण संघर्ष करना पड़ा।
जबकि गोल्ड मोनिटाईजेशन योजना ने एक आशाजनक अवधारणा प्रस्तुत की यह इमोसनली जुड़ाव, प्रक्रियागत कठिनाइयों और कर संबंधी चिंताओं के कारण व्यापक ग्रहण प्राप्त करने में विफल रही। कई व्यक्ति ऐसी योजनाओं में भाग लेने के बजाय सोना स्टोर करने के पारंपरिक तरीकों को प्राथमिकता देते हैं।
क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम
केंद्र सरकार ने डिजिटल गोल्ड को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस योजना को शुरू किया था। हालांकि, इसमें केवल पेपर पर रिटेल निवेशक ऑनलाइन सोने में निवेश कर सकते थे। जिसमें सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का मैच्योरिटी पीरियड रखा गया था। वहीं, निवेशकों के पास ऑप्शन था कि वे पांच साल बाद भी चाहे तो आंशिक रिडीम कर सकते थे।


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