Indian Economy : गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक और बार्कलेज पीएलसी के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक भारत की सालाना इकोनॉमिक ग्रोथ कुछ सालों के लिए लगभग 6 प्रतिशत तक स्लो होने का अनुमान है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ग्रोथ रेट में कमी कोई बहुत बुरी बात नहीं है। यह अर्थव्यस्था के लिए अच्छा संकेत है।

2024 तक बनी रह सकती है कमी
बार्कलेज के राहुल बाजोरिया का कहना है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 6 प्रतिशत का विस्तार एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति को भारतीय रिजर्व बैंक के लक्ष्य तक सीमित करने और बजट और चालू खाता घाटे को कम करने के लिए एक अच्छा संकेत है। 2022 की शुरुआत के बाद से महंगाई आरबीआई के 6 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर रही है। रिजर्व बैंक मुद्रास्फिति में 2024 तक 4 प्रतिशत तक कम करना चाहता है। गोल्डमैन सैक्स के शांतनु सेनगुप्ता का कहना है कि भारत के लिए एक विकास में मंदी अच्छी होगी, उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद ग्रोथ रेट लगभग 7.1 प्रतिशत से कम होकर 6 प्रतिशत हो जाएगा। बजट और चालू खाता के बीच अंतर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे जुड़वां घाटे की समस्या अधिक मैनेजएबल हो जाएगी।

रिजर्व बैंक ने बढ़ाई है ब्याज दर
दक्षिण एशियाई देश विकास दर में बढ़ोत्तरी को खो सकते हैं। इसका कारण मुद्रास्फीति को कम करने के बढ़ाए जा रहे ब्याज दर है। भारतीय रिजर्व बैंक ने मई से अब तक रेपो दर में 190 आधार अंकों की बढ़ोत्तर की है। एक्सिस बैंक लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य ने कहा, भारत में धीमी वृद्धि भी बहुत गहरी वैश्विक मंदी के अनुरूप होगी। बाजार में कम मांग से चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और मुद्रास्फीति की एक तेज गति को सक्षम किया जा सकेगा।

ब्लूमबर्ग के एक सर्वेक्षण में अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि मार्च में समाप्त होने वाले इस वित्तीय वर्ष में भारत का विकास दर 7 प्रतिशत होगा। अगले वर्ष यानि कि 2024 में यह 6.1 प्रतिशत तक धीमा हो जाएगा। वित्तीय वर्ष में मार्च 2024 तक मुद्रास्फीति चालू वित्त वर्ष में 6.7 प्रतिशत से कम होकर 5.1 प्रतिशत तक होने का अनुमान है। इस साल की शुरुआत में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा था कि अगले पांच वर्षों में भारत की विकास क्षमता 6.2 प्रतिशत तक रहेगी। पहले यह अनुमान 7 प्रतिशत का था। बार्कलेज के बाजोरिया का कहना है कि प्रमुख मुद्दा यह है कि दुनिया के बाकी हिस्सों के मुकाबले भारत का बढ़ता विकास अंतर दोतरफा है। भारत का घाटा भी बढ़ रहा है। आर्थिक अनुसंधान फर्म अर्थ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निरंजन राजाध्यक्ष का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अधिकांश अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रही है। लेकिन इसकी गति वैश्विक मंदी से प्रभावित होगी। मुद्रास्फीति के मौजूदा स्तर, व्यापार घाटे और राजकोषीय घाटे को देखते हुए, भारत की विकास दर प्रभावित होगी।
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