नई दिल्ली। वैसे तो इस साल की शुरुआत से अभी तक चांदी का रेट 23 फीसदी तक बढ़ चुका है। लेकिन जानकारों ने उम्मीद जताई है कि चांदी अभी भी 50,000 रुपये प्रति किलो का स्तर पार कर सकती है। आमतौर पर चांदी को गरीबों को सोना कहा जाता है। इसके अलावा चांदी के जेवरों की विदेशों में भी मांग बढ़ रही है। इसके अलावा चांदी का इस्तेमाल औद्योगिक रूप से भी काफी बढ़ रहा है। यही कारण है कि जानकार उम्मीद जता रहे हैं कि चांदी का रेट 50,000 रुपये प्रति किलो तक जा सकता है।
ये हैं आंकड़े
चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2019 में चांदी के जेवरों का निर्यात 76.12 फीसदी बढ़कर 3,936.31 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस वर्ष की शुरुआत में चांदी की कीमत लगभग 37,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो इस समय 47,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चल रही है।
जानें कब तक 50 हजार रुपये के पार हो जाएगी चांदी
जानकारों के अनुसार चांदी पर इस बुलिश सेंटिमेंट हैं। आशा की जा सकती है कि आगामी 6 महीने में लेकर 1 वर्ष में 21 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। जानकारों के अनुसार फरवरी मार्च 2020 से चांदी में और तेजी आने की उम्मीद है। इन जानकारों के अनुसार चांदी ने अभी तक अंडरपरफॉर्म ही किया है। यही कारण है कि चांदी की कीमतों में तेजी आने की गुंजाइश है। जानकारों के अनुसार वही सोना का रेट कंसॉलिडेशन के दौर में लग रहा है। हालांकि जानकारों के अनुसार यह 1,650 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू सकता है। वहीं एक अन्य जानकार के अनुसार 2020 की पहली तिमाही में चांदी 50,000 रुपये से लेकर 52,000 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर छू सकती है।
त्योहारी सीजन में बढ़ी है चांदी की मांग
हाल ही में बीते त्योहारी सीजन में भी चांदी की मांग में बढ़त दर्ज की गई है। बड़े ज्वेलरों के अनुसार इस फेस्टिव सीजन में चांदी की बिक्री पिछले साल की तुलना में करीब 20 फीसदी बढ़ी है। इन लोगों के अनुसार चांदी के जेवर से लेकर सिक्कों की मांग में बढ़त दर्ज की गई है। लोग अब चांदी के जेवर काफी पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा इस फेस्टिव सीजन में ग्रामीण क्षेत्रों में भी चांदी की मांग बढ़ी है। जानकारों के अनुसार सोने का रेट ज्यादा होने के चलते इस बार ग्रामीण इलाकों में चांदी की मांग बढ़़ी है।


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