Silver Price Outlook: चांदी की कीमतों में फरवरी के महीने में लगातार कई दिनों से स्थिरता देखने को मिल रही है। सराफा बाजार में लगातार छह दिनों से चांदी के रेट में कोई भी बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में कई विशेषज्ञों ने चांदी की कीमत में आने वाले समय में होने वाले बदलाव पर जानकारी दी है। इसके साथ ही ये भी बताया है कि फरवरी अंत तक चांदी के दाम में बढ़त होने की संभावना है या नहीं और इसके पीछे कौन-कौन से फैक्टर्स हैं।

सराफा बाजार में चांदी की कीमत
आज 20 फरवरी को लगातार छठवें दिन चांदी की कीमत में स्थिरता है। आज 10 ग्राम चांदी का दाम सराफा बाजार में 1005 रुपये है और 100 ग्राम चांदी का रेट 10,050 रुपये है। 1 किलोग्राम चांदी की कीमत आज 1,00,500 रुपये पर है।
पिछले 2.5 सालों में आया चांदी के दाम में भारी उछाल
स्मार्टवेल्थ एआई के स्मॉलकेस मैनेजर और संस्थापक एवं प्रमुख रिसर्चर पंकज सिंह ने बताया कि पिछले 2.5 सालों में चांदी की कीमतों में भारी उछाल आया है जिसके पीछे कई कारण है। चांदी की कीमत में उछाल के पीछे, कमजोर मार्केट सेंटिमेंट और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव भी माना जा रहा है। चांदी की डिमांड इंडस्ट्रियल सेक्टर, मुख्य रूप से सोलर एनर्जी सेक्टर, इलेक्ट्रिक व्हिकल, 5G नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक्स में देखने को मिली है। इन सेक्टर्स में चांदी की खपत का 55% हिस्सा है। साथ ही, साल 2014 से चांदी की सप्लाई स्थिर हुई है, जिससे डेफिसिट बढ़ रहा है।
पिछले साल, चांदी की कीमत में 33% की उछाल देखने को मिली थी और तीन महीनों में 7% की वृद्धि रही थी। चांदी के दाम में एक महीने में 6% की तेजी भी देखी गई है। चांदी का एलिवेटेड प्राइस बना रहना चुनौतियों से भरा हो सकता है। पिछला ट्रेंड देखें तो मौजूदा मोमेंटम के बाद करेक्शन देखने को भी मिल सकता है। डेटा के अनुसार, वर्तमान में फरवरी में 2% से 4% करेक्शन की संभावना दिखाता है। हालांकि, इक्विटी मार्केट में बढ़ता उतार-चढ़ाव कुछ सहायता भी कर सकती है, जिससे वर्तमान स्तर पर संभावित रूप से 0.5% की बढ़त हो सकती है।
सोलर एनर्जी है जिसमें एक साल में मांग दोगुनी होने की उम्मीद
आस्पेक्ट ग्लोबल वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के वाइस प्रेसिडेंड अक्षा कंबोज ने बताया, "भारतीय चांदी की कीमतें वर्तमान में लगभग ₹100,400 प्रति किलोग्राम हैं। इसके पीछे के फैक्टर ग्लोबल मार्केट के ट्रेंड, करेंसी में उतार-चढ़ाव और इंडस्ट्रियल डिमांड भी हैं। जैसे-जैसे इंटरनेशनल चांदी की कीमतें बढ़ती हैं, $35 प्रति औंस तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे स्थानीय कीमतों पर भी असर पड़ता है। भारत में चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख फैक्टर इंपोर्ट में तेजी भी है। इसमें विशेष रूप से सोलर एनर्जी है जिसमें एक साल में मांग दोगुनी होने की उम्मीद है। इसके अलावा करेंसी में उतार-चढ़ाव, विशेष रूप से भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर के बीच, इंपोर्ट कॉस्ट भी चांदी की कीमतों को भी प्रभावित करते हैं।
भारत की मौद्रिक नीति में हाल ही में हुए बदलाव हुआ था। आरबीआई ने 5 साल बाद रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी जिससे रेपो रेट 6.25% पर आ गया है। ऐसे में चांदी के लिए निवेश करने की मांग को बढ़ावा भी मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, चांदी अक्सर सोने की कीमतों का ट्रेंड फॉलो करती है, और सोने की कीमतों में बढ़त के साथ, चांदी की कीमत बढ़ने की उम्मीद भी रहती है। ग्लोबल टेंशन और इंडस्ट्रियल मांग भी मार्केट को आकार दे रही है, इसलिए चांदी इंडस्ट्रीज और निवेशकों दोनों के लिए एक वैल्युएबल एसेट बन रही है। आने वाले हफ्तों में इन रुझानों पर नजर रखना अहम होगा।"
इंडस्ट्रीयल सेक्टर में यूज भी चांदी की मांग का आधा हिस्सा
जस्टिन खू (वरिष्ठ बाजार विश्लेषक - एपीएसी, वीटी मार्केट्स) ने बताया कि, पिछले छह हफ्तों में से चार में चांदी ईटीएफ पॉजिटिव में बंद हुआ हैं, जो 2025 की शुरुआत से कीमत के रेसिलिएन्ट को दिखाता है। आने वाले महीनों में कीमतों को ग्रीन इकॉनोमी में चांदी की बढ़ती मांग के साथ-साथ सुरक्षित निवेश के रूप में भी देखा जाता है। हालांकि, चांदी की बढ़ती वैल्यू पर जियो पॉलिटिकल टेंशन, खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर का भी असर है। इंडस्ट्रीयल सेक्टर में यूज भी चांदी की मांग का लगभग आधा हिस्सा है। ऐसे में फिजिकल रूप से चांदी में निवेशकों का भरोसा इकोनॉमी में बदलाव के प्रति संवेदनशील है। इन चिंताओं ने iShares Silver Trust ETF की शार्ट टर्म प्राइस बढ़ने की प्रवत्ति को कम करने में मदद की है।
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते ट्रेड टेंशन से निवेशकों का तरीका और भी प्रभावित हुआ है, जिससे चांदी की कीमतों में गिरावट आ सकती है क्योंकि मार्केट प्लेयर्स अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड और इंडस्ट्रियल मांग पर प्रभावों का आकंलन करते हैं।
ऐसा कहा जा रहा है कि, जैसे-जैसे चीन घरेलू खपत(Domestic Consumption) बढ़ाने के अपने प्रयासों को आगे ला रहा है। सिल्वर बुल्स इससे अधिक तेजी हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा, इसकी उच्च चालकता के कारण रिन्यूएबल एनर्जी में चांदी की स्थिति को देखते हुए, 2050 तक Net-zero emissions के लिए दुनिया भर में मेटल के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटलिस्ट है।
33.38 डॉलर की रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचने के बाद चांदी में गिरावट आई है। यदि ट्रेड टेंशन आगे नहीं बढ़ता है, तो चांदी की कीमतें स्थिर हो सकती हैं, निवेशकों को $31.80 या $30.50 के आसपास संभावित खरीद अवसरों पर नजर रखनी चाहिए। इन स्तरों से किसी भी उछाल से चांदी $33.38 से ऊपर कारोबार करेगी। हालांकि, मैक्रोइकॉनोमिक इंडिकेटर और जियो पॉलिटिकल डेवलोपमेंट पर नजर रखनी चाहिए। ये फरवरी 2025 में चांदी की कीमतों को काफी प्रभावित कर रही है।
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