Silver Price Record High: चांदी की कीमतों में आज 5 जून को तूफानी तेजी दर्ज की जा रही. कीमतें पहली बार 104900 रुपए प्रति किलोग्राम के पार निकल गई. वायदा बाजार में कारोबार सेशन के दूसरे हाफ में चांदी का रेट करीब 3500 रुपए तक उछल गया. दरअसल, ग्लोबल मार्केट में चांदी का भाव करीबन 12 साल में सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया. कीमतों में जोश भरने का काम यूएस इकोनॉमिक को लेकर बनी अनिश्चतता, जियो-पॉलिटिकल टेंशन समेत कमजोर होता डॉलर है. फिलहाल चांदी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर हल्का करेक्ट हुआ है.
चांदी ने तोड़े रिकॉर्ड
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर पहली बार 10,4947 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंचा, जोकि ऑल टाइम हाई भी है. कॉमैक्स पर चांदी पहली बार 34.90 डॉलर प्रति ऑन्स तक पहुंचा. यह चांदी का 12 साल में सबसे ऊंचा लेवल है. केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि चांदी में आई यह रैली कमजोर अमेरिकी इकोनॉमिक इंडिकेटर्स, बढ़ता जियो-पॉलिटिकल टेंशन, कमजोर डॉलर और जबरदस्त इंडस्ट्रियल डिमांड है. इंडस्ट्रियल डिमांड की बात करें तो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सोलर एनर्जी सेक्टर से चांदी की जबरदस्त मांग आ रही.
गोल्ड-सिल्वर रेश्यो क्या दे रहा संकेत?
अजय केडिया कहते हैं कि सोने और चांदी का रेश्यो लगातार गिरता जा रहा, जोकि दर्शाता है कि चांदी की मांग सोने के मुकाबले ज्यादा है. यह रेश्यो 107 से फिसलकर 95 पर आ गया है. यानी मौजूदा लेवल से चांदी की कीमतों में बढ़त की संभावना है. हालांकि, सोने में भी तेजी रहेगी, लेकिन चांदी को आउटपरफॉर्म नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर गोल्ड-सिल्वर रेश्यो में गिरावट से चांदी में बढ़त देखने को मिला है.

आगे चांदी कितना होगा महंगा?
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने आगे कहा कि ऐसा नहीं है कि चांदी की कीमतों में लगातार बुल रन ही देखने को मिलेगा. ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी, यूएस-चीन ट्रेड टेंशन और बदलता इन्फ्लेशन डायनमिक्स के चलते मौजूदा अनिश्चितताओं के चलते मार्केट में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है. हालांकि, अजय केडिया ने लॉन्ग टर्म में चांदी के लिए अपसाइड टारगेट दिया है.
उतार-चढ़ाव की संभावना के बावजूद उन्होंने अगले 12 महीने के नजरिए से चांदी अच्छी स्थिति में नजर आ रहा. इस लिहाज से आगे 1 किलोग्राम चांदी की कीमत 130000 रुपए तक पहुंचने का टारगेट दिया है. उन्होंने कहा कि ब्रॉडर मार्केट डेवलपमेंट के साथ कीमतों में करेक्शन भी देखने को मिल सकता है. कुल मिलाकर सिल्वर लगातार दोहरा नरेटिव दर्शा रहा, जिसकी वजह मॉनेटरी हेज और इंडस्ट्रियल ग्रोथ हैं.


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