SIilver Rate Today: भारत में चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है। पूजा-पाठ, शादी-विवाह, तोहफे और निवेश के तौर पर भी चांदी की बड़ी अहमियत है। हाल के वर्षों में चांदी को लोग गोल्ड के विकल्प के रूप में भी देखने लगे हैं।

लेकिन समस्या तब होती है, जब लोग बिना पूरी जानकारी के चांदी खरीद लेते हैं। कई बार कम शुद्ध चांदी ज्यादा दाम में मिल जाती है, जिससे बाद में नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए चांदी खरीदने से पहले उसके ग्रेड को समझना बेहद जरूरी है।
चांदी का ग्रेड क्या होता है
चांदी का ग्रेड उसकी शुद्धता बताता है। आसान भाषा में कहें तो 100 ग्राम धातु में कितनी चांदी है और कितनी दूसरी धातु मिली है, यह ग्रेड से पता चलता है। ग्रेड जितना ज्यादा होगा, चांदी उतनी ही शुद्ध मानी जाती है।
999 ग्रेड चांदी
इसे फाइन सिल्वर भी कहा जाता है। इसमें लगभग 99.9 प्रतिशत शुद्ध चांदी होती है। यह बहुत नरम होती है, इसलिए इससे गहने बनाना मुश्किल होता है। आमतौर पर यह चांदी के सिक्के, बार या बिस्किट के रूप में मिलती है। जो लोग चांदी को निवेश के लिए खरीदते हैं, उनके लिए 999 ग्रेड सबसे बेहतर माना जाता है।
925 ग्रेड चांदी
यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला ग्रेड है। इसमें 92.5 प्रतिशत चांदी होती है और बाकी हिस्सा दूसरी धातु का होता है, जिससे गहने मजबूत बनते हैं। बाजार में मिलने वाले ज्यादातर चांदी के गहने इसी ग्रेड के होते हैं। गहनों पर "925" की मुहर देखकर आप इसकी पहचान कर सकते हैं।
900 और 800 ग्रेड चांदी
कुछ पारंपरिक गहनों और पुराने समय की चांदी में 90 प्रतिशत या 80 प्रतिशत शुद्धता होती है। इनमें दूसरी धातु ज्यादा मिली होती है, इसलिए इनकी कीमत भी कम रहती है। यह रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए तो ठीक है, लेकिन निवेश के लिहाज से इसे अच्छा विकल्प नहीं माना जाता।
खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान
चांदी खरीदते वक्त हमेशा हॉलमार्क जरूर जांचें। BIS हॉलमार्क यह भरोसा देता है कि चांदी की शुद्धता जांची गई है। इसके साथ ही पक्का बिल लेना न भूलें, जिसमें वजन, ग्रेड और कीमत साफ लिखी हो।
सही जानकारी से मिलेगा फायदा
अगर आपको चांदी के ग्रेड की सही जानकारी होगी, तो आप ठगे जाने से बच सकते हैं। चाहे गहनों के लिए खरीदारी हो या निवेश के लिए समझदारी से लिया गया फैसला ही लंबे समय में आपको फायदा दिला सकता है।


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