Silver 1 Rs Coin: चांदी के सिक्कों को हमेशा से कीमती गिफ्ट के तौर पर देने का चलन रहा है। अभी भी लोग शादी में चांदी का सिक्का उपहार के तौर पर लड़के या लड़की वालों को देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा भी समय था जब अचानक से चांदी के सिक्कों को बंद कर दिया गया था। आइए आपको बताते हैं कि इसके पीछे क्या कारण था और ऐसा कब हुआ था।

1 रुपये का चांदी का सिक्का
भारत में पहला एक रुपये का चांदी का सिक्का 1757 में जारी किया गया था और इसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने जारी किया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, इस 1 रुपये के चांदी के सिक्के का वजन 11.5 ग्राम के करीब था। इस पर बिट्रेन का तत्कालीन राजा जॉर्ज II का फोटो था।
इस वजह से बंद हो गया था चांदी का सिक्का
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, ऐतिहासिक रिकॉर्ड में पहला चांदी का सिक्का जिसका मूल्य 1 रुपये था, 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने जारी किया था। इस सिक्के पर किंग जॉर्ज द्वितीय का चित्र था और इसका वजन लगभग 11.5 ग्राम था। कोलकाता में यह पहला एक रुपये का सिक्का 19 अगस्त 1757 को शुरू हुआ था। साल 1757 से 1835 तक ईस्ट इंडिया कंपनी इन सिक्कों का बनाती थी। ब्रिटिश सरकार ने भारत में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए इन सिक्कों को बनाना जारी रखा। कई लोगों ने इन सिक्कों का रोजाना लेन-देन के लिए इस्तेमाल शुरू कर दिया। इन सिक्कों को बनाने वाले मजदूरों को 3 रुपये से 4 रुपये तक दिए जाते थे।
साल 1947 में इन सिक्कों का इस्तेमाल कम हो गया और इनकी जगह लोग नोट का इस्तेमाल करने लगे जिसपर किंग जार्ज की फोटो बनी रहती थी। यही कारण है कि कॉस्ट को कम करने और चांदी की कम उपलब्धता के कारण वह नोट प्रिंट करने लगे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान चांदी की कीमतें बढ़ीं, जिससे चलन में एक रुपये के सिक्के की छवि वाले नोटों की छपाई को बढ़ावा मिला। बाद में चांदी का सिक्का फिर से शुरू हुआ लेकिन उसकी क्वाटिंटी और चलन कम हो गया।


Click it and Unblock the Notifications