नई दिल्ली, अप्रैल 13। विश्व बैंक ने बुधवार को भारत और पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए अपने आर्थिक विकास के अनुमान में कटौती की। इसके लिए इसने आपूर्ति में बाधाओं और यूक्रेन संकट के कारण बढ़ते मुद्रास्फीति जोखिमों का हवाला दिया है। वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत के लिए अपने विकास दर अनुमान को 8.7 फीसदी से घटा कर 8 फीसदी कर दिया। विश्व बैंक ने अफगानिस्तान को छोड़ कर दक्षिण एशिया के लिए विकास अनुमान को 1 फीसदी घटा कर 6.6 फीसदी कर दिया।

खपत होगी बाधित
वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि भारत में महामारी और मुद्रास्फीति के दबाव से श्रम बाजार की अधूरी रिकवरी से घरेलू खपत बाधित होगी। दक्षिण एशिया के विश्व बैंक के उपाध्यक्ष, हार्टविग शेफ़र ने एक बयान में कहा कि यूक्रेन में युद्ध के कारण तेल और खाद्य कीमतों में वृद्धि लोगों की वास्तविक आय (रियल इनकम) पर एक मजबूत नकारात्मक प्रभाव डालेगी।
ऊर्जा आयात पर निर्भरता
विश्व बैंक के अनुसार ऊर्जा आयात पर क्षेत्र की निर्भरता का मतलब है कि कच्चे तेल की उच्च कीमतों ने दक्षिण एशियाई क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को लगभग दो वर्षों के महामारी प्रतिबंधों के बाद आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने के बजाय अपनी मौद्रिक नीतियों को मुद्रास्फीति पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर किया है। विश्व बैंक ने फॉसिल फ्यूल के बड़े आयात और रूस और यूक्रेन से पर्यटन में कमी का हवाला देते हुए इस साल के लिए मालदीव की ग्रोथ रेट के लिए विकास अनुमान को 11 फीसदी से घटा कर 7.6 फीसदी कर दिया।
श्रीलंका की हालत खराब
इसने संकटग्रस्त श्रीलंका के 2022 की ग्रोथ के अनुमान को 2.1 फीसदी से बढ़ा कर 2.4 फीसदी कर दिया, लेकिन चेतावनी दी कि राजकोषीय और बाहरी असंतुलन के कारण देश का दृष्टिकोण अत्यधिक अनिश्चित है। विश्व बैंक ने जून में समाप्त होने वाले चालू वर्ष के लिए क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पाकिस्तान के लिए अपने विकास पूर्वानुमान को 3.4 फीसदी से बढ़ा कर 4.3 फीसदी कर दिया और अगले वर्ष की ग्रोथ के दृष्टिकोण को 4 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा।


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